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ये है 'नमक हराम ड्योढ़ी', जहां रहता था भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा 'विश्वासघाती'

Thu, 10 Dec 2020 03:46 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नमक हराम ड्योढ़ी - फोटो : Facebook/Soumojit Mukhopadhyay
इतिहास में कई ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिन्हें सदियों से याद किया जाता रहा है और शायद आगे भी याद किया जाएगा। आज हम आपको ऐसी ही एक घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने भारत की तकदीर बदल कर रख दी थी और इस घटना ने एक शासक को भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा 'विश्वासघाती' बना दिया था। हम बात कर रहे हैं मीर जाफर की, जो 18वीं शताब्दी में बंगाल का नवाब था। वैसे तो शुरुआत में वह बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला का सेनापति था, लेकिन बाद में उसने ऐसा धोखा दिया, जिसे शायद ही कभी देश भुला पाए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मीर जाफर को गद्दारी की सबसे बड़ी मिसाल माना जाता है। वह एक ऐसा आदमी था जो दिन-रात एक ही सपना देखता था और वो सपना था बंगाल का नवाब बनने का। वह प्लासी के युद्ध में अंग्रेज अफसर रॉबर्ट क्लाइव के साथ मिल गया था, क्योंकि उसने मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाने का लालच दे दिया था। इस घटना को भारत में ब्रिटिश राज की स्थापना की शुरुआत माना जाता है। 
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नमक हराम ड्योढ़ी - फोटो : Facebook/Calcutta Karavan
मीर जाफर की वजह से ही नवाब सिराजुद्दौला की जान गई थी और अंग्रजों ने अपने पैर भारत में जमाए थे। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के लागबाग इलाके में एक हवेली है, जिसे मीर जाफर की हवेली माना जाता है। मीर जाफर की गद्दारी की वजह से ही इस हवेली को 'नमक हराम ड्योढ़ी' कहा जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मीर जाफर की इसी हवेली में उसके बेटे मीर मीरन ने नवाब सिराजुद्दौला को जान से मारने का हुक्म दिया था। जुलाई 1757 को उन्हें इसी 'नमक हराम ड्योढ़ी' में फांसी पर लटकाया गया था और अगले दिन उनकी लाश को हाथी पर चढ़ाकर पूरे मुर्शिदाबाद में घुमाया गया था। आज यह ड्योढ़ी एक खंडहर बनकर रह गई है। यहां बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं और इतिहास के उन पन्नों से रूबरू होते हैं, जिसने भारत का इतिहास बदल दिया था।
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