उत्तरी ध्रुव के ऊपर ओजोन में छेद एक दुर्लभ घटना है, लेकिन अंटाकर्टिका के ऊपर पिछले 35 साल से हर साल इससे भी बड़ा छेद बार-बार पैदा हो जाता है। हालांकि इसका आकार हर साल घटता बढ़ता रहता है, लेकिन निकट भविष्य में तो बंद होता नहीं दिखता।
1996 में क्लोरोफ्लोरोकार्बन का इस्तेमाल बंद हो गया था, तब से इसमें थोड़ा-थोड़ा सुधार दिखा है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे केमिकल का इस्तेमाल एयरोसोल स्प्रे, फोम, सॉल्वेंट और रेफ्रिजरेंट्स बनाने में होता है। वर्ल्ड मेटरोलॉजिकल्स ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएमओ) का कहना है कि अंटाकर्टिका के ऊपर ओजोन का छेद 2000 से अब तक एक से तीन फीसदी तक छोटा हो चुका है। हालांकि 2019 में अंटाकर्टिका में सबसे छोटा छेद रिकॉर्ड किया गया था, लेकिन(डब्ल्यूएमओ) का कहना है कि अंटाकर्टिका की ओजोन परत की छेद को भरने के लिए कम से कम 2050 तक इंतजार करना होगा।