अधिकारियों ने बताया कि वधावन भाई सीबीआई की उस प्राथमिकी में आरोपी बनाए गए हैं जो कपूर और अन्य द्वारा पैसों की ठगी किए जाने से जुड़ी हुई है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि 62 वर्षीय कपूर ने येस बैंक के जरिए डीएचएफएल को वित्तीय मदद देने के नाम पर वधावन भाइयों के साथ मिलकर साजिश रची और बदले में उनके नाम पर चल रही कंपनियों के माध्यम से खुद को और अपने परिवार को अनुचित लाभ दिलाया।
सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार इस घोटाले को अप्रैल से जून 2018 के बीच अंजाम देना शुरू किया गया जब येस बैंक ने घोटालों से घिरी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशम लिमिटेड (डीएचएफएल) के कम अवधि वाले ऋण पत्रों में 3,700 करोड़ रुपयों का निवेश किया।
इसके बदले में, वधावन भाइयों ने कथित तौर पर '600 रुपये की रिश्वत' कपूर और परिवार के सदस्यों को डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) लिमिटेड को ऋण के रूप में लौटाई। यह कंपनी कपूर की पत्नी और बेटियों के नाम पर है।
सीबीआई के अलावा, येस बैंक घोटाले मामले में वधावन भाइयों से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी पूछताछ कर रहा है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के प्रवक्ता आर के गौर ने दोनों की गिरफ्तारी के बाद कहा था, 'कपिल और धीरज वधावन जांच की शुरुआत से फरार थे और इसमें शामिल होने से बच रहे थे।'