जासूसी करने के भी अजब-गजब तरीके होते हैं। खुफिया कोड, बनावटी बातें, खास जबान, चेहरे पर चेहरा, हनीट्रैप वगैरह वगैरह...। कुल मिलाकर खुफियागिरी या जासूसी आम तौर पर लोगों की नजरें बचाकर, छुप-छुपाकर की जाती है, ताकि दुश्मन की नजर ना पड़े। कोई जान न जाए। लेकिन आप ने कभी नहीं सुना होगा कि कोई देश रेडियो स्टेशन से जासूसी करता है और वो भी खुलेआम, पूरी दिलेरी से। नहीं सुना, तो चलिए आपको एक ऐसे रेडियो स्टेशन का किस्सा सुनाते हैं।