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वो रहस्यमय ग्रह, जहां लगातार 42 साल तक दिन और 42 साल तक रहती है रात

Tue, 04 Feb 2020 09:38 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अरुण ग्रह का नाम तो आपने सुना होगा, जिसे अंग्रेजी में यूरेनस के नाम से जाना जाता है। इस ग्रह को गैस दानव भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें मिट्टी-पत्थर के बजाय अधिकतर गैस है और इनका आकार बहुत ही विशाल है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह सौरमंडल का पहला ऐसा ग्रह है, जिसे टेलिस्कोप से ढूंढा गया था। यह सौरमंडल के आठ ग्रहों में सूर्य से दूरी के आधार पर सातवां सबसे दूर ग्रह है। आज हम आपको इस ग्रह की कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। 

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अरुण ग्रह - फोटो : Social media
अरुण यानी यूरेनस अपने अक्ष पर करीब 17 घंटे में एक चक्कर पूरा कर लेता है। इसका सीधा-सीधा मतलब है कि यूरेनस पर एक दिन मात्र 17 घंटे का ही होता है। यहां का एक साल पृथ्वी के 84 साल के बराबर होता है। 
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सौरमंडल के ग्रह - फोटो : Pixabay
आपको यह जानकर बेहद ही हैरानी होगी कि अरुण पर 42 साल तक रात और 42 साल तक दिन होता है। इसका कारण यह है कि अरुण पर दोनों में से एक पोल यानी ध्रुव लगातार 42 साल तक सूर्य के सामने और दूसरा अंधकार में होता है। 

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अरुण ग्रह - फोटो : Social media
अरुण ग्रह सूर्य से लगभग तीन अरब किलोमीटर दूर है। यही वजह है कि यह ग्रह बहुत ही ठंडा है। यहां का औसत तापमान -197 डिग्री सेल्सियस होता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अरुण का न्यूनतम तापमान -224 डिग्री सेल्सियस देखा गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जहां पृथ्वी का महज एक ही चंद्रमा है, वही अरुण के कुल 27 प्राकृतिक उपग्रह यानी चंद्रमा हैं। हालांकि इनमें से अधिकतर चंद्रमा बहुत ही छोटे और असंतुलित हैं। इनका भार बहुत ही कम है। 
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सौरमंडल के ग्रह - फोटो : Pixabay
अरुण अपने अक्ष पर 98 डिग्री तक झुका हुआ है। यही कारण है कि यहां मौसम बहुत ही असामान्य रहता है। यहां हमेशा तूफान जैसा माहौल बना रहता है। यहां हवाएं काफी तेज चलती रहती हैं जो अधिकतम 900 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक पहुंच जाती हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अरुण ग्रह पर बादलों की अनेक परतें पाई जाती हैं। सबसे ऊपर मीथेन गैस होती है। इसके अलावा अरुण ग्रह के केंद्र में बर्फ और पत्थर पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरुण ग्रह पर मीथेन गैस की अधिकता, तापमान और हवा के कारण यहां हीरे की बारिश होती हो। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सूर्य के अधिक दूरी होने के कारण इस ग्रह पर सूर्य की किरणों को पहुंचने में दो घंटे 40 मिनट का समय लगता है। यह पृथ्वी से लगभग 20 गुना अधिक है। पृथ्वी पर सूर्य की किरणों को पहुंचने में आठ मिनट 17 सेकेंड का समय लगता है।  
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