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वो दीवार, जिसने रातों-रात एक देश को दो हिस्सों में बांट दिया था

Mon, 27 Apr 2020 10:56 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बर्लिन की दीवार - फोटो : Social media
क्या आपने कभी किसी ऐसी दीवार के बारे में सुना है, जिसने एक देश को दो हिस्सों में बांट दिया हो और वो भी रातों-रात, लेकिन कुछ सालों के बाद वो दो हिस्से फिर से एक हो गए हों? जी हां, ऐसी दीवार का नाम है बर्लिन की दीवार, जो जर्मनी में है। इस दीवार ने 28 साल तक बर्लिन शहर को पूर्वी और पश्चिमी टुकड़ों में विभाजित करके रखा था। 13 अगस्त, 1961 को इसका निर्माण शुरू हुआ था, जो 14 अगस्त की सुबह तक चला था और नौ नवंबर 1989 को इसे तोड़ दिया गया था। 
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बर्लिन की दीवार - फोटो : Social media
बर्लिन की यह दीवार करीब 160 किलोमीटर लंबी थी। इसे बनाने वाले अभियान का नाम दिया गया था 'ऑपरेशन पिंक'। दरअसल, इस दीवार को बनाने के पीछे की कहानी कुछ इस तरह है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जब जर्मनी का विभाजन हो गया, तो सैकड़ों कारीगर और व्यवसायी हर दिन पूर्वी बर्लिन को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन जाने लगे। इसके अलावा कुछ लोग राजनैतिक कारणों से भी पूर्वी बर्लिन को छोड़कर जाने लगे थे, जिससे पूर्वी जर्मनी को आर्थिक और राजनैतिक दोनों रूप से बहुत नुकसान होने लगा था। 
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1961 में बर्लिन की दीवार - फोटो : Social media
आखिरकार लोगों के प्रवासन को रोकने के लिए एक दीवार बनाने की सोची गई और उसी दीवार को आज दुनिया बर्लिन की दीवार के नाम से जानती है। इसे बनाने की मंजूरी सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता निकिता ख्रुश्चेव ने दी थी। माना जाता है कि दीवार बन जाने के बाद लोगों का प्रवासन काफी हद तक कम हो गया। एक अनुमान के मुताबिक, साल 1949 और 1962 के बीच जहां 25 लाख लोग पूर्वी बर्लिन को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन गए, तो वहीं साल 1962 से 1989 के बीच सिर्फ पांच हजार लोग। 

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बर्लिन की दीवार - फोटो : File photo
हालांकि दीवार बनने की वजह से बहुत सारे लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी, क्योंकि जब भी कोई व्यक्ति चोरी-छुपे दीवार फांदकर पूर्वी बर्लिन से पश्चिमी बर्लिन जाने की कोशिश करता, उसे सीधे गोली मार दी जाती। हालांकि इसके बावजूद बहुत से लोगों ने दीवार पार करने के अनोखे तरीके खोज लिए थे, जैसे- सुरंग बनाकर लोग उस पार चले जाते या फिर गरम हवा के गुब्बारों में घुसकर भी दीवार पार कर जाते। इसके अलावा लोग तेज रफ्तार गाड़ियों से दीवार को तोड़ते हुए निकल जाते थे। 
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1961 में बर्लिन की दीवार - फोटो : Social media
1980 के दशक में जब सोवियत संघ कमजोर पड़ने लगा तो पूर्वी जर्मनी में दीवार के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए। आखिरकार नौ नवंबर 1989 को दीवार तोड़ दी गई और जर्मनी फिर से एक हो गया। हालांकि दीवार के कई हिस्से आज भी बर्लिन में मौजूद हैं, जिसे देखने के लिए दुनियाभर के लोग जाते रहते हैं। 
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