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ये डॉक्टर अपने मरीजों की मौत की खबर देने से पहले देखता है उनका फेसबुक, वजह जानकर रो पड़ेंगे

Thu, 31 Jan 2019 03:39 PM IST
पंखुड़ी सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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डॉक्टर्स को लोग भगवान का ही रूप मानते हैं. भले ही दौर कलयुग का चल रहा हो लेकिन दुनिया में अच्छाई और इंसानियत अभी भी बाकी है। कुछ लोग हैं जो तकलीफ में फरिश्ता बनकर आते हैं ताकि जिंदगी से उम्मीद खत्म न हो और इसका जीता जगता उदहारण हैं डॉक्टर लुइस प्रोफेट। कई लोग समझते हैं कि मौत देख-देख कर डॉक्टर पत्थर हो जाते हैं पर सच्चाई ये है कि उन्हें पत्थर होना पड़ता है, दूसरों की ज़िन्दगी संवारने के लिए। 
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किसी को खुशखबरी देना तो आसान है, लेकिन किसी को उसके किसी अपने की मरने की खबर देना बेहद मुश्किल है। डॉक्टर्स लगभग रोज इस असमंजस से गुजरते हैं। सेंट विन्सेंट  हॉस्पिटल , इंडिआनापलिस के डॉक्टर लुइस प्रोफेट अपने मरीज की मृत्यु की खबर उसके माता-पिता को बताने से पहले, मरीज का फेसबुक पेज चेक करते हैं। लेकिन उनके एेसा करने के पीछे एक भावुक कारण है। 
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एक लिक्डइन पोस्ट में उन्होंने ऐसा करने की पीछे की वजह विस्तार से बताई है। अपने एक नौजवान मरीज की मौत की खबर उसके मां-बाप को देने के लिए डॉक्टर ने बेहद भावुक मैसेज लिखा है। डॉक्टर मरीज का फेसबुक इसलिए चेक करते हैं ताकि वो उसकी तस्वीरों को देखकर उसके जीवन को करीब से समझ पाएं। उसके करीबियों को जान पाएं, जिन्हे वो मरीज के मौत की खबर देने वाले हैं। ऐसा वो इसलिए भी करते हैं ताकि एक डॉक्टर होने के नाते वो किसी की मौत की खबर को रोज का काम न समझ बैठें, और मरने वाले के परिवार का दर्द समझ सकें और उन्हें पूरी संवेदना के साथ बता सकें। 
 

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मैं तुम्हारी मां को तुम्हारी मौत की खबर देने से पहले तुम्हारा फेसबुक प्रोफाइल देखूंगा।पढ़िए डॉक्टर द्वारा मरीज को लिखा गया खत। ये मुझे इंसान बनाए रखता है. तुम तो जानते ही हो कि मैं तुम्हारे मम्मी-पापा की पूरी ज़िन्दगी बदलने वाला हूं। अब से 5 मिनट में वो पहले जैसे नहीं रहेंगे, पहले की तरह ख़ुश नहीं रहेंगे। सच कहूं तो अभी तुम अख़बारों से भरे किसी गीले बैग जैसे हो, जिसमें आईवी लाइन, ट्यूब और सुइयां घुसेड़ी गई हैं और जिसे हम बचाने की कोशिश कर रहे हैं। तुम में ज़िन्दगी नहीं है, न ही तुम मुझे अपने सपनों के बारे में बता सकते हो। ये मेरा फर्ज़ है कि तुम्हारे जाने की ख़बर उन्हें देने से पहले मैं तुम्हारे बारे में जानूं। 

 
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फ़िल्हाल मुझे तुम पर काफ़ी गुस्सा आ रहा है। तुमने जो ख़ुद के साथ किया उस पर, और जो तुम अभी अपने माता-पिता के साथ करने वाले हो, उस पर। मैं तुम्हारे बारे में कुछ नहीं जानता। तुम्हारी मां के लिए मुझे तुम्हारी ज़िन्दगी से भरी दुनिया में झांकना होगा। हो सकता है तुम रास्ता न देख कर मैसेज कर रहे थे, या फिर तुमने पी रखी थी और तुमने ऊबर नहीं किया था। हो सकता है तुमने पहली बार नशा किया हो। 

 
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हो सकता है तुम बिना हेल्मेट के बाइक चला रहे थे या फिर तुमने अपने मम्मी-पापा के मना करने के बाद भी 'उस दोस्त' के साथ घूमना बंद नहीं किया। हो सकता है तुमने बस हार मान ली हो।हो सकता है तुम्हारा वक़्त आ गया था। पर तुम्हारा वक़्त न आया हो, इसके भी पूरे आसार हैं। मैं अपने फोन से तुम्हारे ड्राइविंग लाइसेंस की तस्वीर खींचता हूं और फ़ेसबुक पर तुम्हारा नाम ढूंढता हूं। इसके पूरे आसार हैं कि हम दोनों का एक दोस्त होगा ही क्योंकि मैं कई लोगों को जानता हूं। 
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- फोटो : social media
मैं तुम्हें वही कैप या जैकेट पहने देखता हूं जिसे अभी कैची से काटा गया है। शायद तुम उसे कॉन्सर्ट में पहन कर गए थे। मैं तुम्हारी मुस्कुराहट देखता हूं, तुम्हारी आंखों का रंग देखता हूं, जिनमें ज़िन्दगी भरी है। बीच पर, मोमबत्ती बुझाते हुए, दादी के साथ क्रिसमस मनाते हुए जो वक़्त तुमने बिताया, वो सब देखता हूं। मैं देख रहा हूं कि मम्मी-पापा के साथ तुम्हारे कॉलेज बोर्ड के बाहर तुम्हारी एक तस्वीर है। अच्छा है, अब मुझे पता रहेगा कि मैं किन से बात करने जा रहा हूं। तुम क़िस्मतवाले हो कि तुम अपने मम्मी-पापा को इस तरह नहीं देख रहे हो. तुम्हारे पापा बार-बार तुम्हारा नाम चिल्ला रहे हैं, मां जमीन पर गिरकर अपने बाल खींच रही है। अपने हाथ उसने सिर पर यूं रखे हैं मानो किसी की मार से बचन चाह रही हो। 
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- फोटो : social media
मैं तुम्हारी मौत की खबर उन्हें देने से पहले तुम्हारा फेसबुक पेज इसलिए देखता हूं ताकी मुझे याद रहे कि मैं एक इंसान के बारे में बात रहा हूं। डॉक्टर्स के लिए लाशें देखना रोज़ का काम है और ये मुमकिन है कि ये उनके लिए कोई बड़ा संवेदनशील मुद्दा न हो। लेकिन जब एक डॉक्टर किसी लाश को इंसान समझकर उसकी दुनिया में झांकने की कोशिश करे, तो उसके लिए दिल में अपार प्रेम और सम्मान जागता है।
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