वोजरोझडेनीया द्वीप
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आज कांटुबेक कस्बा पूरी तरह से भुतहे शहर में तब्दील हो गया है, लेकिन किसी दौर में यहां रहने वालों के निशान आज भी मिलते हैं। मकान, स्कूल, कैंटीन, मार्क्स और लेनिन की किताबें, सोवियत नेताओं के बुत। सब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है। यहां पर आपको न तो एक भी परिंदा दिखेगा और न ही एक भी कीड़ा। पूरे इलाके में सन्नाटे की चीख सुनाई पड़ती है। जो स्थानीय लोग निक और बटलर के साथ आए थे, वो सामान लूटकर जल्द से जल्द निकलना चाहते थे। निक बताते हैं कि लैब आज भी वैसे ही खुली पड़ी हैं। यहां पर जो जहरीले केमिकल थे, न तो उन्हें हटाया गया और न ही दबाकर रखा गया। ऐसे में प्रयोगशालाओं के भीतर जाना बेहद खतरनाक था। यहां पर मास्क, सांस लेने की नली, पूरे शरीर को ढंकने वाले लबादे पड़े मिले। पंद्रह मिनट के अंदर ही बटलर और निक के एयर फिल्टरों ने काम करना बंद कर दिया था। यानी हवा इतनी जहरीली थी कि फिल्टर उन्हें छान नहीं पा रहे थे। इसलिए निक और बटलर दोनों ही वहां से जल्दी से जल्दी भाग निकलना चाहते थे, वरना उनकी जान को भी खतरा हो सकता था।