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100 साल पहले फैली थी कोरोनावायरस से भी खतरनाक बीमारी, मारे गए थे करोड़ों लोग

Mon, 09 Mar 2020 12:19 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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100 साल पहले फैली थी यह खतरनाक बीमारी - फोटो : Social media
सौ साल पहले प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान करीब दो करोड़ लोग मारे गए थे। उस युद्ध के परिणामों से दुनिया अभी उबरी नहीं थी कि उसे अचानक एक और भयानक संकट ने घेर लिया, और ये था फ्लू का प्रकोप। 'स्पेनिश फ्लू' नाम से जानी जाने वाली यह महामारी पश्चिमी मोर्चे पर स्थित छोटे और भीड़ वाले सैन्य प्रशिक्षण शिविरों में शुरु हुई। इन शिविरों और खासतौर पर फ्रांस की सीमा के करीब की खंदकों में गंदगी की वजह से ये बीमारी पनपी और तेजी से फैली। 
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100 साल पहले फैली थी यह खतरनाक बीमारी - फोटो : Social media
युद्ध तो नवंबर 1918 में समाप्त हो गया था, लेकिन घर वापिस लौटने वाले संक्रमित सैनिकों के साथ यह वायरस भी अन्य क्षेत्रों में फैलता गया। इस बीमारी की वजह से बहुत सारे लोग मारे गए। माना जाता है कि स्पेनिश फ्लू से पांच से दस करोड़ के बीच लोग मारे गए थे। 
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नई दिल्ली के खान मार्केट में मास्क पहने घूमते लोग - फोटो : PTI
दुनिया में उसके बाद भी कई महामारियां फैलीं लेकिन इतनी घातक और व्यापक कोई और महामारी नहीं रही। फिलहाल जब दुनिया में COVID-19 का प्रकोप सुर्खियों मे है, तो हम नजर डाल रहे हैं 100 साल पहले फैले स्पेनिश फ्लू के कारण पैदा हुई स्थिति पर, ताकि आप जान सकें कि उस महामारी से हमने क्या सबक सीखे थे। COVID-19 से मरने वाले कई लोग एक प्रकार के निमोनिया का शिकार हुए हैं जो वायरस से लड़ने में कमजोर हो चुके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हावी हो जाता है। 

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नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के बाहर एक दवा की दुकान पर कोरोनावायरस से बचाव के लिए मास्क पहने हुए लोग। - फोटो : PTI
COVID-19 और स्पेनिश फ्लू के बीच यह एक समानता है, हालांकि स्पेनिश फ्लू की तुलना में COVID-19 से संक्रमित लोगों की मृत्यु दर काफी कम है। अभी तक इस बीमारी से मरने वाले लोगों में अधिकांश बूढ़े लोग हैं या ऐसे लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर थी। ऐसे लोगों में संक्रमण भी आसानी से हुआ और उन्हें निमोनिया हो गया जिसका सीधा असर उनके फेफड़ों की क्षमता पर पड़ा। 
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100 साल पहले फैली थी यह खतरनाक बीमारी - फोटो : Social media
जब स्पेनिश फ्लू फैला था तब दुनिया में हवाई यात्रा की शुरुआत बस हुई थी। यह बड़ी वजह थी कि उस समय दुनिया के दूसरे देश बीमारी के प्रकोप से अछूते रहे। उस समय बीमारी रेल और नौकाओं में यात्रा करने वाले यात्रियों के जरिए ही फैली इसलिए उसका प्रसार भी धीमी गति से हुआ। कई जगहों पर स्पेनिश फ्लू को पहुंचने में कई महीने और साल लग गए, जबकि कुछ जगहों पर यह बीमारी लगभग पहुंची ही नहीं। उदाहरण के तौर पर, अलास्का। इसकी वजह थी वहां के लोगों द्वारा बीमारी को दूर रखने के लिए अपनाए गए कुछ बुनियादी तरीके। 
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100 साल पहले फैली थी यह खतरनाक बीमारी - फोटो : Social media
अलास्का के ब्रिस्टल बे इलाके में यह बीमारी नहीं फैली। वहां के लोगों ने स्कूल बंद कर दिए, सार्वजानिक जगहों पर भीड़ के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी और मुख्य सड़क से गांव तक पहुंचने बाले रास्ते बंद कर दिए। अब कोरोना वायरस को रोकने के लिए उसी तरह के मगर आधुनिक तरीके चीन और इटली में अपनाए जा रहे हैं, जहां लोगों की आवाजाही और उनके भीड़ वाली जगहों जाने को नियंत्रित किया जा रहा है।  
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स्पेनिश फ्लू के शिकार हुए लोग - फोटो : Social media
डॉक्टर स्पेनिश फ्लू को 'इतिहास का सबसे बड़ा जनसंहार' बताते हैं। बात केवल यह नहीं है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग इससे मारे गए बल्कि यह कि इसका शिकार हुए कई लोग जवान और पूरी तरह स्वस्थ थे। आमतौर पर स्वस्थ लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता फ्लू से निपटने में सफल रहती है, लेकिन फ्लू का यह स्वरूप इतनी तेजी से हमला करता था कि शरीर की प्रतिरोधक शक्ति पस्त हो जाती. इससे सायटोकिन स्टॉर्म नामक प्रतिक्रिया होती है और फेफड़ों में पानी भर जाता है जिससे यह बीमारी अन्य लोगों में भी फैलती है। उस समय बूढ़े लोग इसका शिकार कम हुए क्योंकि संभवत: वो 1830 में फैले इस फ्लू के एक दूसरे स्वरूप से जूझ चुके थे। फ्लू की वजह से विश्व के विकसित देशों में सार्वजानिक स्वास्थ्य प्रणाली में काफी विकास हुआ, क्योंकि सरकारों और वैज्ञानिकों को अहसास हुआ की महामारियां बहुत तेजी से फैलेंगी। 

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स्पेनिश फ्लू के शिकार हुए लोग - फोटो : Social media
कोरोना वायरस से ज्यादा खतरा बूढ़े और पहले से बीमार लोगों को है। हालांकि इस बीमारी में मृत्यु दर कम है किंतु 80 से अधिक उम्र के लोगों में यह सबसे अधिक है। स्पेनिश फ्लू विश्व में तब फैला जब वह प्रथम युद्ध से उबर ही रहा था और उस समय संसाधन सैन्य कार्यों में लगा दिए गए थे और सार्वजानिक स्वास्थ्य प्रणाली की परिकल्पना अधिक विकसित नहीं थी। कई जगहों पर केवल मध्य और उच्च वर्ग के लोग ही डॉक्टरों से इलाज करवाने की क्षमता रखते थे। 
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100 साल पहले फैली थी यह खतरनाक बीमारी - फोटो : Social media
स्पेनिश फ्लू से मरने वालों में अधिकांश लोग झुग्गियों या शहरों के गरीब इलाकों में रहते थे जहां सफाई और पोषक आहार की कमी थी। शहरी इलाकों में मामले दर मामले लोगों का इलाज करना महामारी से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। सरकारों को युद्ध स्तर पर संसाधन लगाने होंगे, संक्रमित लोगों को अलग रखना होगा, और उसमें भी बच्चों को गंभीर रूप से संक्रमित लोगों से अलग रखना होगा। साथ ही लोगों की आवजाही पर नियंत्रण लगाने पड़ेंगे ताकि बीमारी खुद ही खत्म हो जाए। कोरोना वायरस से निबटने के लिए आज जो सार्वजानिक स्वास्थ्य के कदम उठाए जा रहे हैं वो स्पेनिश फ्लू के परिणामों से सीखे गए सबक का ही नतीजा हैं।  
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