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क्या असल जिंदगी में सच हो सकती है जॉम्बी वाली कहानी? वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला जवाब

Mon, 21 Sep 2026 07:16 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

डरावनी हॉरर फिल्म में जॉम्बी वाली कहानी देखने को मिलती है। लेकिन क्या असल जिंदगी में भी यह कहानी सच हो सकती है। वैज्ञानिकों ने इस सवाल का चौंकाने वाला जवाब दिया है। 
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क्या असल जिंदगी में सच हो सकती है जॉम्बी वाली कहानी? वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला जवाब - फोटो : AI
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विस्तार
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आप कल्पना कीजिए कि आप बिल्कुल सामान्य है और अपना हर दिन का काम कर रहे हैं। इसी दौरान आपके शरीर में कोई अदृश्य जीव प्रवेश कर जाए और आपके व्यवहार में बदलाव लाने लगे। आपको उन कामों को करने के लिए मजबूर करने लगे, जिससे उसका फायदा हो। सुनने में यह किसी डरावनी हॉरर फिल्म की कहानी प्रतीत होती है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्रकृति में ऐसे जीव वास्तव में मौजूद हैं। यह जीव फिल्मों के जॉम्बी की तरह इंसानों को नियंत्रित नहीं करते हैं, लेकिन कुछ फंगस और पैरासाइट अपने मेजबान जीवों के व्यवहार को ऐसे प्रभावित कर सकते हैं कि वैज्ञानिक भी उनके तरीकों को देखकर चौंक जाते हैं। 

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चींटी को जॉम्बी बना देता है फंगस!

इससे सबसे प्रसिद्ध उदाहरण ओफियोकोर्डिसेप्स नाम का परजीवी फंगस है। यह विशेष तरह की चीटियों को संक्रमित करता है। संक्रमण के बाद चींटी का व्यवहार बदल जाता है और सामान्य नहीं रहता। वह अपनी कॉलोनी और सामान्य रास्ते से अलग हो जाती है। इसके बाद वह किसी पौधे पर चढ़ सकती है और एक खास जगह जाकर अपने जबड़ों से पत्ती या तने को मजबूती से पकड़ लेती है। इसके बाद चींटी की मौत हो जाती है। 

लेकिन यहीं पर कहानी खत्म नहीं होती। चींटी के शरीर से फंगस का विकास होता है और बाद में बीजाणु छोड़ता है। यह बीजाणु आसपास मौजूद दूसरी चींटियों को संक्रमित कर सकते हैं। मतलब फंगस ने एक चींटी के शरीर को अपने जीवन चक्र को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया। सबसे रहस्यमयी बात यह है कि वैज्ञानिकों को अभी तक पूरी तरह समझ नहीं आया है कि यह फंगस चींटी के व्यवहार में इतने सटीक बदलाव कैसे लाते हैं।
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टॉक्सोप्लाज्मा से भी बदल सकता है जानवरों का व्यवहार

फंगस के अलावा कुछ ऐसे पैरासाइट भी है, जो अपने मेजबान के व्यवहार में बदलाव लाते हैं। टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी इसका एक चर्चित उदाहरण है, जो चूहों को संक्रमित कर सकता है और उनके व्यवहार में बदलाव को देखने को मिला है। विशेष तौर पर संक्रमित चूहों में बिल्लियों के प्रति सामान्य डर में कमी हो सकती है।

 यह बदलाव पैरासाइट के लिए बेहद अहम है, क्योंकि बिल्ली इस पैरासाइट की प्रमुख शिकार होती हैं। जब संक्रमित चूहे का बिल्ली का शिकार करती है, तो पैरासाइट बिल्ली के शरीर तक पहुंच जाता है और अपना जीवन चक्र पूरा कर सकता है। टॉक्सोप्लाज्मा इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है और शरीर के ऊतकों में लंबे समय तक मौजूद रह सकता है। हालांकि, इंसानों के व्यवहार पर इसके प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक अभी भी शोध कर रहे हैं। इसलिए इसे इंसानों को जॉम्बी बनाने वाला पैरासाइट कहना वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं है। 

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रेबीज वायरस का मामला और गंभीर

 रेबीज वायरस नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। इससे संक्रमित व्यक्ति या जानवर में बेचैनी, भ्रम, असामान्य व्यवहार, मतिभ्रम और निगलने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण पैदा कर सकता है। इसके कारण कभी-कभी रेबीज से संक्रमित जानवारों का व्यवहार में फिल्मों में देखि जॉम्बी जैसा लग सकता है। लेकिन  वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। यह किसी जीव द्वारा दिमाग को अपने नियंत्रण लेने का मामला नहीं है, बल्कि एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जिससे नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। रेबीज बेहद एक खतरनाक बीमारी है। अगर लक्षण शुरू हो जाता है, तो लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है। हालांकि, संक्रमित जानवर के संपर्क में आने के बाद समय पर चिकित्सा और वैक्सीनेशन से इसे रोका जा सकता है।
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क्या इंसान भी बन सकते हैं जॉम्बी? 

यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इंसान भी जॉम्बी बन सकते हैं? क्या कोई फंगस या पैरासाइट इंसान के दिमाग पर कब्जा कर सकता है और उसे अपने हिसाब से चला सकता है। फिलहाल शोधकर्ताओं के पास इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ओफियोकोर्डिसेप्स जैसे फंगस बेहद खास जीवों के साथ विकसित हुए हैं। चींटियों के व्यवहार को प्रभावित करने की उनमें क्षमता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वो इंसानों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे ही टॉक्सोप्लाज्मा इंसानों को संक्रमित कर सकता है, लेकिन इंसानों में वैसा व्यवहार नियंत्रण नहीं नजर आता है, जैसा कुछ अन्य मेजबानों में देखने को मिलता है। असली दुनिया फिल्मों से भी अधिक रहस्यमयी है।

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इसके कारण ही वैज्ञानिक इन जीवों के बारे में अध्ययन कर रहे हैं। इन जीवों के रहस्यों को समझने से न सिर्फ प्रकृति की जानकारी मिलती है, बल्कि भविष्य में नई दवाओं, उपचारों और जैविक नियंत्रण के तरीकों के विकास में भी सहायता मिल सकती है। फिल्मों में दिखाए जाने वाले जॉम्बी काल्पनिक हैं, लेकिन प्रकृति के व्यवहार बदलने वाले जीव पूरी तरह वास्तविक हैं। शायद सबसे डराने वाली बात यह है कि प्रकृति ने ऐसे सिस्टम बना लिए हैं, जो देखने में किसी साइंस-फिक्शन फिल्म से कम नहीं हैं। 

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