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आखिर क्या है ब्लैक होल का रहस्य, जिसके अंदर जाने के बाद कुछ भी बाहर नहीं आ पाता

Fri, 15 May 2020 06:23 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्लैक होल के बारे में तो आपने सुना ही होगा, जिसे 'कृष्ण विवर' भी कहा जाता है। क्या आप जानते हैं कि यह 'चीज' आखिर है क्या और इसे क्यों रहस्यमय माना जाता है? दरअसल, ब्लैक होल अंतरिक्ष में एक शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र वाली जगह है, जहां भौतिक विज्ञान का कोई भी नियम काम नहीं करता। इसका खिंचाव इतना शक्तिशाली होता है कि इससे कुछ भी बच नहीं सकता। यहां तक कि प्रकाश भी अगर एक बार ब्लैक होल के अंदर चला जाए तो वो फिर कभी बाहर नहीं आ पाता। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आपको जानकर हैरानी होगी कि ब्रह्मांड में कई ब्लैक होल हैं। हालांकि वो सभी पृथ्वी से हजारों प्रकाश वर्ष दूर हैं। अगर वो नजदीक होते तो पृथ्वी को कब का निगल गए होते और फिर धरती पर इंसानों का नामोनिशान नहीं रहता। क्या आप जानते हैं कि आखिर ब्लैक होल बनता कैसे है? वैज्ञानिक तौर पर ऐसा माना जाता है कि जब कोई विशाल तारा अपने अंत की ओर पहुंचता है तो वह धीरे-धीरे एक ब्लैक होल में परिवर्तित हो जाता है और फिर वो अपने आसपास की सारी चीजों को अपनी तरफ खींचने लगता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अब जरा सोचिए कि अगर आप ब्लैक होल में गिर जाएं तो क्या होगा? वैसे तो यह लगभग असंभव सा है, क्योंकि ब्लैक होल तक पहुंचने से पहले ही आप जलकर राख हो जाएंगे या हो सकता है कि आप उसके अंदर पहुंच भी जाएं। अब ब्लैक होल के अंदर घुसने के बाद क्या होगा? क्या कोई दूसरा ब्रह्मांड आ जाएगा या आप दूसरी दुनिया में पहुंच जाएंगे? ये कोई नहीं जानता, क्योंकि यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पिछले साल ही वैज्ञानिकों ने एम87 आकाशगंगा में मौजूद एक विशाल ब्लैक होल की तस्वीर जारी की थी। बताया गया था कि यह ब्लैक होल आकार में पृथ्वी से तीस लाख गुना बड़ा है और वजन में हमारे सूर्य से 650 करोड़ गुना से भी ज्यादा भारी। इसे ब्रह्मांड का सबसे बड़ा ब्लैक होल माना गया है। कहा जाता है कि ब्रह्मांड के करोड़ों तारों को मिलाकर जितनी रोशनी होगी, यह उससे भी कहीं ज्यादा चमकदार है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हाल ही में वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के सबसे नजदीक एक ब्लैक होल की खोज की है, जो दो तारों के बीच छुपा हुआ है। यह धरती से करीब 1000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह आकार में हमारे सूरज से चार गुना बड़ा है जबकि वजन में पांच गुना। इसकी खोज चिली स्थित ला सिला ऑब्जर्वेटरी ने टेलीस्कोप के जरिए की है। 
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