Bihar News : नीतीश कुमार खुद मिट्टी में मिलने की बात करते रहे हैं। वह तो कहते रहे हैं कि मिट्टी में मिल जाएंगे, लेकिन यह नहीं करेंगे, वह नहीं करेंगे। राजनीति की डिक्सनरी में यह शब्द तो नीतीश जी ने ही लाया है। इसलिए, उन्हें ही सोचना चाहिए कि उन्होंने तब क्यों कहा था। अब कोई कहे तो उसपर वह क्या बोलेंगे?
बिहार में मिट्टी पॉलिटिक्स फिर उखड़ा है। पिछली बार मॉल के मिट्टी घोटाले के रूप में, इस बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी के बयान के रूप में। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने साथी उपेंद्र कुशवाहा भी इसमें कूद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार खुद मिट्टी में मिलने की बात करते रहे हैं। वह तो कहते रहे हैं कि मिट्टी में मिल जाएंगे, लेकिन यह नहीं करेंगे, वह नहीं करेंगे। राजनीति की डिक्सनरी में यह शब्द तो नीतीश जी ने ही लाया है। इसलिए, उन्हें ही सोचना चाहिए कि उन्होंने तब क्यों कहा था। अब कोई कहे तो उसपर वह क्या बोलेंगे?
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उपेंद्र बोले- नीतीश जी को खुद ही सोचना चाहिए
RLJD के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जिस शब्द की आप चर्चा कर रहे हैं, उस शब्द का इस्तेमाल सिर्फ सम्राट जी ने नहीं किया है। स्वयं नीतीश जी अपने बारे में बोलते रहे हैं कि हम मिट्टी में मिल जाएंगे लेकिन यह काम नहीं करेंगे। "मिट्टी में मिल जाएंगे" शब्द का इस्तेमाल तो राजनीति के डिक्शनरी में नीतीश जी ने तो खुद ही किया है। आज अगर उनके बारे में कहीं से इस्तेमाल हो रहा है तो नीतीश जी को खुद ही सोचना चाहिए कि हमने जब इस्तेमाल किया था। खुद अपने बारे में उस वक्त मुझे करना चाहिए था या नहीं।
18 साल बाद हुआ गलती का एहसास
उपेंद्र कुशवाहा ने आगे कहा कि नीतीश जी क्या काम करते हैं कि अब उनको खुद ही एहसास हो रहा होगा। 18 साल पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने शिक्षक बहाली की जो प्रक्रिया अपनाई उसे अब जाकर बदल दिया गया। बदलना जरूरी था कि यह बात ठीक है लेकिन इतने दिनों बाद उनको यह एहसास हुआ कि जो हम शिक्षकों को बहाल करेंगे। उससे शिक्षा व्यवस्था चौपट हो जाएगी। उनकी जो गलती है उसे सुधारने उसके बाद जितना प्रचार करना है कर लें।