अब बस घर लौटने का इंतजार
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लोग हर रोज दे रहे केवल दिलासा
सुरंग में फंसे भोजपुर के पेउर गांव के सबाह अहमद उर्फ सैफ के पिता मिस्बाह अहमद ने बताया कि उनका बेटा उत्तराखंड में सड़क परियोजना में काम कर रही नव योगा कंपनी में पर्यवेक्षक है। आठ दिन पहले जब वहां सुरंग हादसे की खबर आई तो परिवार में कोहराम मच गया। अगले दिन उन्हें वाकी-टाकी की रिकार्डिंग कर बेटे की आवाज घटनास्थल के पास से मोबाइल पर सुनाई गई। तब जाकर परिजनों को सुकून मिला। भरोसा दिया गया कि एक से दो दिन में सभी कामगारों को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो सका है। इंतजार लंबा हो रहा है और हर रोज वहां से केवल दिलासा दिया जा रहा है कि शाम में बाहर आएंगे तो अगले दिन बाहर आ जाएंगे। परिजनों का कहना है कि अब तो उन लोगों के कहे पर भरोसा भी नहीं हो रहा है।. उन्होंने बताया कि सबाह का चचेरा भाई भी उसी कंपनी में दूसरी जगह काम करता है, उसी के जरिए वहां की गतिविधियों की जानकारी मिल रही है।
घर के लोगों के साथ साथ ग्रामीण भी परेशान
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बस अब उम्मीद बची है
सबाह सुरंग बनाने वाली नव योगा कंपनी में पिछले 12 सालों से काम कर रहा है। वह दो साल पहले इस परियोजना से जुड़े थे। 32 वर्षीय सबाह अहमद उर्फ सैफ के पिता मिस्बाह अहमद ने बताया कि ड्यूटी जाने से पहले सबाह फोन पर बात किया था और बताया कि वो नाइट ड्यूटी पर जा रहा है सुबह वापस आयगा तो दुबारा बात करेगा लेकिन उसके फोन आने के पहले टनल धंसने की मनहूस खबर आ गई। अब बस यही उम्मीद है कि जल्द वो सकुशल बाहर आये।
सरकार से है बस एक आरजू
सैफ के पिता मिस्बाह अहमद ने भावुक होते हुए सरकार से अपील करते हुए कहा कि मेरे घर का एकलौता चिराग है सैफ, मुझे और मेरी बीमार पत्नी को उसका बेटा चाहिए और बछु को उसका शौहर चाहिए। घर में तीन पोता है, बहु है, हार्ट की मरीज सैफ की मां है। हर दिन हमलोग टूटते जा रहे है। आज 11 दिन होने को आये, सरकार क्या कर रही है कुछ समझ में नही आ रहा है। बस सरकार से आरजू है कि मेरे चिराग को मेरे घर वापस कर मेरे घर को रौशन कर दे।