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Tunnel Uttarkashi: बिहार के इस परिवार में हरेक की पथराई आंखें, कर रही उत्तरकाशी सुरंग से उसके निकलने का इंतजार

Fri, 24 Nov 2023 05:37 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर

सार

Bihar : उत्तरकाशी में निर्माणाधीन भूगर्भ सुरंग के धंसने से उसमें फंसे 41 कामगारों में सबाह अहमद उर्फ सैफ भी है जिसके पिता अपने घर के दरवाजे पर ही बैठकर इस उम्मीद से समय गुजार दे रहे हैं कि कोई तो उसके एकलौते चिराग की अच्छी खबर लेकर आए। 
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मोबाइल में एकलौते बेटे की तस्वीर देख कर रहे सब्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोजपुर का रहने वाला युवक आज देहरादून के उत्तरकाशी के टनल में पिछले 9 दिनों से फंसा है.हजारो किलोमीटर दूर उधर टनल में फंसे युवक की सांस अटकी है और इधर उसके पूरे परिवार की उम्मीद सिर्फ इस खबर पर टिकी है कि उनके घर का एकलौता कमाने वाला सदस्य सुरक्षित टनल से बाहर निकल जाय। मोबाइल पर बेटे की आवाज सुनने के बाद उम्मीद तो बरकार है लेकिन एक-एक दिन बीतने के साथ इंतजार लंबा होता जा रहा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन भूगर्भ सुरंग के धंसने से उसमें फंसे 41 कामगारों में शामिल भोजपुर के सहार प्रखंड के पेउर गांव के 32 वर्षीय सबाह अहमद उर्फ सैफ के पिता मिस्बाह अहमद का. वे घर के दरवाजे पर ही अधिकांश समय इस उम्मीद से गुजार रहे हैं कि कोई तो अच्छी खबर लेकर आए।

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अब बस घर लौटने का इंतजार - फोटो : अमर उजाला
लोग हर रोज दे रहे केवल दिलासा 
सुरंग में फंसे भोजपुर के पेउर गांव के सबाह अहमद उर्फ सैफ के पिता मिस्बाह अहमद ने बताया कि उनका बेटा उत्तराखंड में सड़क परियोजना में काम कर रही नव योगा कंपनी में पर्यवेक्षक है। आठ दिन पहले जब वहां सुरंग हादसे की खबर आई तो परिवार में कोहराम मच गया। अगले दिन उन्हें वाकी-टाकी की रिकार्डिंग कर बेटे की आवाज घटनास्थल के पास से मोबाइल पर सुनाई गई। तब जाकर परिजनों को सुकून मिला। भरोसा दिया गया कि एक से दो दिन में सभी कामगारों को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो सका है। इंतजार लंबा हो रहा है और हर रोज वहां से केवल दिलासा दिया जा रहा है कि शाम में बाहर आएंगे तो अगले दिन बाहर आ जाएंगे। परिजनों का कहना है कि अब तो उन लोगों के कहे पर भरोसा भी नहीं हो रहा है।. उन्होंने बताया कि सबाह का चचेरा भाई भी उसी कंपनी में दूसरी जगह काम करता है, उसी के जरिए वहां की गतिविधियों की जानकारी मिल रही है।
 
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घर के लोगों के साथ साथ ग्रामीण भी परेशान - फोटो : अमर उजाला
बस अब उम्मीद बची है 
सबाह सुरंग बनाने वाली नव योगा कंपनी में पिछले 12 सालों से काम कर रहा है। वह दो साल पहले इस परियोजना से जुड़े थे। 32 वर्षीय सबाह अहमद उर्फ सैफ के पिता मिस्बाह अहमद ने बताया कि ड्यूटी जाने से पहले सबाह फोन पर बात किया था और बताया कि वो नाइट ड्यूटी पर जा रहा है सुबह वापस आयगा तो दुबारा बात करेगा लेकिन उसके फोन आने के पहले टनल धंसने की मनहूस खबर आ गई। अब बस यही उम्मीद है कि जल्द वो सकुशल बाहर आये।

सरकार से है बस एक आरजू 
सैफ के पिता मिस्बाह अहमद ने भावुक होते हुए सरकार से अपील करते हुए कहा कि मेरे घर का एकलौता चिराग है सैफ, मुझे और मेरी बीमार पत्नी को उसका बेटा चाहिए और बछु को उसका शौहर चाहिए। घर में तीन पोता है, बहु है, हार्ट की मरीज सैफ की मां है। हर दिन हमलोग टूटते जा रहे है। आज 11 दिन होने को आये,  सरकार क्या कर रही है कुछ समझ में नही आ रहा है। बस सरकार से आरजू है कि मेरे चिराग को मेरे घर वापस कर मेरे घर को रौशन कर दे।
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