बिहार में लोकसभा सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा और जदयू के बीच छिड़ी जुबानी जंग अब लगभग थम गई है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बात बन गई है। अगले लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 16 सीटें मिलेंगी, जो भाजपा से महज एक ही कम है।
बता दें कि नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा से 'सम्मानजनक' सीटों की मांग की थी और इसके लिए वो लगातार अपनी सहयोगी पार्टी भाजपा पर दबाव बना रहे थे।
एनडीटीवी के सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच सितंबर के दूसरे हफ्ते में एक मीटिंग हुई थी, जिसमें इस डील पर मुहर लगी है। भाजपा और जदयू के अलावा एनडीए गठबंधन में शामिल केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को क्रमश: पांच और दो सीटें मिली हैं।
इस संबंध में भाजपा की ओर से आधिकारिक घोषणा इस हफ्ते संभव है। हालांकि उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को एक अशांत सहयोगी के रूप में देखा जाता है और अगर यह चुनाव से पहले एनडीए गठबंधन से निकलने का फैसला करती है तो उसके लिए भी एक आकस्मिक योजना बनाई गई है। अगर ऐसा होता है तो आरएलएसपी को मिलने वाली दोनों सीटों को भाजपा और जदयू के बीच बांट दिया जाएगा।
2014 में जदयू ने अकेले लड़ा था चुनाव
बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू ने बिहार की सभी 40 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा था, जिसमें वो मात्र दो सीटें ही जीत पाई थी और अन्य सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत ही जब्त भी गई थी। वहीं, भाजपा ने इन चुनावों में 22 और उसके गठबंधन सहयोगियों में लोजपा ने 6 व रालोसपा ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
2009 के लोकसभा चुनाव में क्या हुआ था?
2009 के भी लोकसभा चुनाव में जदयू और भाजपा एकसाथ चुनाव लड़े थे। जदयू 25 और भाजपा 15 सीटों पर मैदान में उतरी थी। तब नीतीश कुमार का बिहार में जलवा था। उस समय जदयू ने कुल 20 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 12 सीटें मिली थी।