तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार (file photo)
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राजद नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को बिहार के शराबबंदी कानून में प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति जताई है। इसमें आरोपी को आपूर्तिकर्ताओं का नाम बताने पर जेल की सजा से छूट का प्रावधान है। तेजस्वी का कहना है कि निजी दुश्मनी निकालने के लिए इसका खुले तौर पर दुरुपयोग किया जा सकता है।
झूठा दावा कर सकता है आरोपी
प्रस्तावित संशोधन को मंगलवार को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई और विधायिका द्वारा पारित होने के बाद इसके लागू होने की संभावना है। विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी ने पत्रकारों द्वारा संशोधन के बारे में पूछे जाने पर इसका मजाक उड़ाया। अपने वरिष्ठ पार्टी सहयोगी आलोक मेहता की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि मान लीजिए कि आलोक जी शराब के नशे में हैं और वह मेरे खिलाफ शिकायत करते हैं। वह पुलिस के सामने झूठा दावा कर सकते हैं कि उन्हें तेजस्वी ने शराब की आपूर्ति की है। हंसी के ठहाकों के बीच उन्होंने कहा कि इस हास्यास्पद संशोधन का भारी दुरुपयोग हो सकता है। यह भयावह है कि न्यायपालिका द्वारा बार-बार फटकार लगाने के बावजूद यह सरकार अपने तरीके नहीं बदल रही है।
ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि प्रस्तावित संशोधन भारत के मुख्य न्यायाधीश एन रमना द्वारा राज्य के शराबबंदी कानून पर नाराजगी व्यक्त करने के बाद किया गया है, जिसके कारण अदालत का कामकाज जमानत याचिकाओं के कारण रुक गया है। नीतीश कुमार सरकार ने 2016 में राज्य में शराब की बिक्री और खपत पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था, तब संयोग से तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम थे।
बहरहाल, शराबबंदी को लागू कराना संदिग्ध बना हुआ है और ऐसे आरोप लगे हैं कि जिनके पास पैसे हैं, वे अपने घरों में शराब मंगवा रहे हैं। जबकि गरीबों पर या तो कानून का उल्लंघन करने के लिए मामला दर्ज किया जा रहा है या शराब के सेवन से उनकी मौत हो रही है। राज्य में पिछले कुछ महीनों में जहरीली शराब के सेवन से 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने ड्रोन, खोजी कुत्तों और हेलीकॉप्टरों की मदद से निगरानी का आह्वान करते हुए शराब के उपयोग पर नकेल कसने की कसम खाई है।