वहीं इस मामले को लेकर जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष फैसल इमाम ने किसी भी पागल व्यक्ति द्वारा किसी तरह का बयान देने से हमलोग इत्तेफाक नहीं रखते हैं। ऐसे बयानों का मुस्लिम भाइयों बिल्कुल समर्थन नहीं करते। ऐसे बयान देने वाले लोगों को अल्लाह सद्बुद्धि दें। वहीं
प्रयागराज में हुई थी हत्या, इसे बाद विपक्ष ने योगी सरकार पर साधा था निशाना
बता दें कि 15 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शनिवार की देर रात माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई थी। अतीक और अशरफ को उस वक्त गोली मारी गई जब वो दोनों मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गए थे। तीन हमलावरों ने दनादन गोलियां बरसाईं। अतीक को आठ गोलियां और अशरफ को छह गोलियां मारी गई थीं। तीन गोलियां अशरफ के शरीर में फंसी रह गईं। इसके बाद इस घटना की काफी चर्चा होने लगी। इस पर राजनीति भी खूब हुई। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंंह ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में अपराध की पराकाष्ठा हो गई है और अपराधियों के हौसले बुलंद है। जब पुलिस के सुरक्षा घेरे के बीच सरेआम गोलीबारी करके किसी की हत्या की जा सकती है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या। वहीं असदुद्दीन ओवैसी
दोनों की हत्या योगी के कानून व्यवस्था की नाकामी है। एनकाउंटर राज का जश्न मनाने वाले भी इस हत्या के जिम्मेदार हैं। जिस समाज में हत्यारे हीरो होते हैं, उस समाज में कोर्ट और इंसाफ के सिस्टम का क्या काम? वहीं बिहार के
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने योगी सरकार से सवाल पूछा था कि अपराधियों के सफाया का क्या मतलब है। उनको मार दीजिएगा ? यह कोई तरीका है। इसका मतलब जो जेल जाएगा तो उसे मार दीजिएगा? ऐसा कोई नियम है। यह तो कोर्ट न तय करती है कि उसे क्या सजा देनी है। वहीं उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि इस देश में प्रधानमंत्री के हत्यारों पर ट्रायल चला। हत्यारों को सजा भी मिली लेकिन यूपी में जो हुआ, यह
अतीक जी का जनाजा नहीं बल्कि कानून का जनाजा निकला है।