फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छुट्टी होगी या BJP को अलविदा कहेंगे 'बिहारी बाबू'

विज्ञापन
विज्ञापन
बिहार में भाजपा के लिए सबकुछ सही नहीं चल रहा है, विपक्षी दल प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां रद करने को मुद्दा बना रहे हैं तो अपने भी रोज उसकी राह में नए कांटे बो रहे हैं। भाजपा के लिए कुछ ऐसा ही किरादार बने हुए हैं पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पटना से सांसद शत्रुघन सिन्हा।
विज्ञापन


शॉटगन और बिहारी बाबू के नाम से प्रसिद्ध शत्रुघन का बगावती रुख भाजपा के लिए खासी मुसीबत का सबब बना हुआ है। चुनावों में जहां भाजपा नीतीश और लालू की मुश्किल चुनौती से जूझने के लिए अपने तरकश के तमाम तीरों का इस्तेमाल कर रही है वहीं शत्रुघन सिन्हा अपने बयानों से उसके वार हल्के किए जा रहे हैं।

अब तक संघ प्रमुख के आरक्षण पर दिए गए जिस अति विवादित बयान से पार्टी जैसे तैसे अपना पिंड छुड़ाने की कोशिश में लगी थी शत्रुघन ने इस मुद्दे पर भागवत का समर्थन कर फिर उसे भाजपा से चिपका दिया है।
विज्ञापन

चुनाव बाद शॉटगन की छुट्टी कर सकती है भाजपा

इसके अलावा वह बिहार में मोदी की रैली रद करने पर भी सवाल उठा चुके हैं जबकि भाजपा इस बात को सिरे से ही नकारती रही है। दाल की बढ़ती कीमतों पर भी वह केन्द्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर चुके हैं, उस सरकार को जिसके मुखिया भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी हैं।

ऐसे में इन सारे मामलों की टाइमिंग सीधे-सीधे एक सवाल खड़ा करती है कि क्या वह भाजपा को बाय-बाय कहने का मूड बना चुके हैं। एक दिन पहले कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सूरजेवाला के साथ उनकी मुलाकात भी इन अटकलों को और बल देती है।

यह तो जगजाहिर हो चुका है कि पटना से दूसरी बार लोकसभा सांसद बने शत्रुघन सिन्हा केन्द्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार में कोई पद और संगठन में भी दरकिनार किए जाने से नाराज चल रहे हैं। बेलौस शत्रुघन अपनी इस नाराजगी को छुपाते भी नहीं हैं और जब तब जाहिर करते रहते हैं।

इसी वजह से वह भाजपा नेतृत्व के निशाने पर भी चल रहे हैं। यही कारण है कि मौजूदा विधानसभा चुनावों में स्टार कैंपेनर होने के बाद भी भाजपा ने उन्हें इससे दूर ही रखा है। जिसने शत्रुघन की नाराजगी और बढ़ा दी है।
विज्ञापन

सुरक्षित ठिकाने की तलाश में लगे बिहारी बाबू

संभावना यही जताई जा रही है कि शत्रुघन की बगावत पर भाजपा जल्द ही कोई कार्रवाई कर सकती है, बस उसे इंतजार है तो बिहार के विधानसभा चुनाव खत्म होने का। क्योंकि बीच चुनाव भाजपा विरो‌धियों को कोई भी ऐसा मुद्दा नहीं देना चाहती जिससे उसके समीकरण गड़बड़ाएं।

दूसरी ओर इस बात के संकेत शायद शत्रुघन को भी मिल चुके हैं, इसलिए उन्होंने भी सुरक्षित ठिकाने की तलाश शुरू कर दी है। जिससे वह पार्टी से सम्मानजनक विदाई ले सकें।

नीतीश कुमार से नजदीकियों के चलते उनके जेडीयू में जाने की बात भी लंबे समय से चलती रही है लेकिन इसमें बड़ा पेंच यही है कि जेडीयू की पहचान अभी क्षेत्रीय पार्टी के रूप में ही है ऐसे में बड़े कद वाले शत्रुघन शायद वहां खुद को एडजेस्ट न कर पाएं इसलिए उन्हें किसी बड़े घर की तलाश है, जो शायद उन्हें कांग्रेस तक ले जा रही है।

अब यह तो वक्त ही तय करेगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा लेकिन अटकलें हैं कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें