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Shardiya Navratri: आज मां शैलपुत्री की पूजा, शक्ति की आराधना कर रहे बिहारवासी; जानिए, कब है सर्वोत्तम मुहूर्त

Sun, 15 Oct 2023 09:11 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

इस बार शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर पधारेंगी। यह एक शुभ संकेत है। इस वर्ष सर्वत्र संपन्नता रहेगी और देश में अच्छी वर्षा होने की भी सम्भावना है। 
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Shardiya Navratri 2023 Calendar - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज से बिहारवासी मां शक्ति की भक्ति में रम गए हैं। पहले दिन कलश स्थापित कर श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करेंगे। इस साल अंग्रेजी की तिथि से पंचांग की तिथि मेल खा रही है। तिथियों की हानि नहीं होने पर इस बार नौ दिनों तक मां के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा होने वाली है। यानी नवरात्र 23 अक्टूबर तक रहेगा। 24 अक्टूबर को विजया दशमी होगी। आज पहले दिन श्रद्धालु मां शैलपुत्री की पूजा कर रहे हैं। कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा हो रही है।

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जानिए, कितने से कितने बजे तक मुहूर्त
पंडितों के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 14 अक्तूबर, शनिवार की रात 11:26 मिनट से प्रारंभ होकर 15 अक्तूबर को देर रात 12:33 मिनट पर समाप्त हो रही है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग हो तो उस समय कलश स्थापना नहीं की जा सकती, लेकिन शास्त्रों के अनुसार चित्रा नक्षत्र के तीसरे चरण से चौथे चरण तक कलश स्थापना की जा सकती है। पंडितों के अनुसार, कलश स्थापना रविवार को सूर्योदल के बाद से पूर दिन किया जा सकता है लेकिन आज पूजा के लिए सर्वोत्त मुहूर्त सुबह 11:36 से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक है। 

हाथी पर सवार होकर आ रही हैं माता रानी 
इस बार शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर पधारेंगी। यह एक शुभ संकेत है। इस वर्ष सर्वत्र संपन्नता रहेगी और देश में अच्छी वर्षा होने की भी सम्भावना है।  देवी भागवत पुराण के अनुसार जिस वर्ष माता हाथी पर सवार होकर आती है, उस वर्ष सुख-समृद्धि और धन लाती हैं। उस साल अच्छी खेती के भी संकेत रहते हैं।
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जानिए, कलश स्थापना की पूजा विधि

  • नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • एक चौकी बिछाकर वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं।
  •  रोली और अक्षत से टीका करें और फिर वहां माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
  • विधि विधान से माता की पूजा करें।
  • इस बात का ध्यान रखें कि कलश हमेशा उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में स्थापित करें।
  • कलश के मुंह पर चारों तरफ अशोक के पत्ते लगाकर  नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांध दें। 
  • अब मां दुर्गा का आह्वान करें और दीपक जलाकर पूजा करें।

 

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