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Bihar: राज्यपाल अर्लेकर बोले- अगर कश्मीर में कुछ होता है तो कन्याकुमारी में बैठे लोगों को भी सताती है चिंता

Sun, 24 Dec 2023 07:00 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगीर

सार

Rajendra Vishwanath Arlekar: राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने कहा कि जब भी हमारे देश में कुछ होता है तो हमको लगता है। हमको कहीं न कहीं दर्द होता है। अभी उत्तराखंड में टनल में जो हादसा हुआ, वहां 41 लोग फंसे हुए थे तो हम सबको यह चिंता हो रही थी कि क्या हो रहा होगा उनका। पढ़ें पूरी खबर...।
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कार्यक्रम में स्मृति चिह्न ग्रहण करते राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार के राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की राज्य शाखा का फैमिली कैंप 2023 का आयोजन 24 से 27 दिसंबर 2023 तक होना है। इस कार्यक्रम में देश के कई राज्यों के संगठनों से जुड़े परिवार सम्मिलित हो रहे हैं। रविवार को बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर आयोजित फैमिली कैंप का शुभारंभ करने राजगीर पहुंचे। जहां उनका शॉल और मोमेंटो देकर स्वागत किया गया।

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राज्यपाल अर्लेकर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि फैमिली एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जरिए आज हम सब यहां इकट्ठे हुए हैं। बिहार के बाहर से जो लोग आए हैं, वे कुछ अपेक्षाएं लेकर यहां आए हैं। फैमिली एसोसिएशन ऑफ इंडिया का यह जो कार्यक्रम है यह अपने देश को समझने के लिए है। हमारा इतना बड़ा देश है कि हमारी पूरी जिंदगी यहां बीती तो भी हम अपने देश में सभी जगहों पर घूम नहीं पाएंगे। इतना बड़ा अपना देश है।

‘हमें अपने पूरे देश को देखना समझना चाहिए’
राज्यपाल ने कहा कि अपने इस देश की विरासत पर ऐतिहासिक, संस्कृति, समृद्धि, परंपरा पर हम सब को गर्व है। हमको लगता है कि हमारा इतना बड़ा देश है वह कभी न कभी हमें देखने के लिए मिलना चाहिए, समझने को मिलना चाहिए। इसलिए हमारा यह जो कार्यक्रम है फैमिली कैंपेन अपने परिवार के साथ सभी जगह से लोग इकट्ठा आए हैं और प्रदेश को समझें, देश को समझें। यहां का रहन-सहन कैसा है।, यहां की वेशभूषा कैसी है, खानपान का रीति-रिवाज कैसा है और क्या भाषा बोलते हैं। इन सब को कभी न कभी समझने की आवश्यकता होती है। हम सब को लगता है कि इतना बड़ा देश है, कहां जाएंगे। लेकिन यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ने आपके लिए एक परंपरा बनाई है कि यहां आकर एक-एक प्रदेश को देख सकते हैं, समझ सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि तीन-चार दिनों में कुछ होगा नहीं, फिर भी आपके मन में एक इच्छा उत्पन्न हो सकती है। जरूर एक बार और बिहार में जाना है। देखना है, यहां के लोगों के साथ रहकर समझना है कि बिहार क्या है। इसके लिए आपके मन में प्रेरणा उत्पन्न हो सकती है, ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है, इस कार्यक्रम के द्वारा।
 
‘राम जी से रामलू, एकता का मार्ग’
राज्यपाल ने कहा कि एकता की भावना, हम सब एक ही तो हैं। प्रभु रामचंद्र का नाम बिहार में आकर कैसा होता है, राम जी कहते हैं, महाराष्ट्र में जाते हैं तो रामचंद्र कहते हैं, कर्नाटक में जाते हैं तो रामनाथ जी, रामन, कहीं रामलु कहते हैं। प्रभु रामचंद्र अयोध्या से आते हैं और पूरे अपने दक्षिण भारत में जाते हैं। कन्याकुमारी तक वहां से आगे श्रीलंका तक जाते हैं। यह सब जो है वह एकता का मार्ग है और कुछ नहीं है। श्री कृष्ण के बारे में ऐसे ही कहते हैं।
 
‘बिहार की ऐतिहासिक परंपराओं और संस्कृति को जानें समझें’
राजेंद्र अर्लेकर ने कहा कि हमारे बिहार के बारे में इसके इतिहास के बारे में विमर्श हुआ। विचार रखा गया कि बिहार कितना समृद्ध था, ऐतिहासिक परंपराएं कैसी हैं। मैं यहां आने के पहले यही सारी बातें सुनता रहा। लेकिन मेरे मन में प्रश्न आ रहा था कि बिहार की ऐतिहासिक परंपराएं, संस्कृति, समृद्धि इतनी है तो आज कहां है। मैं इस विषय में जाना नहीं चाहूंगा सिर्फ इसका उल्लेख हुआ, इसलिए मैं कहता हूं इसके बारे में सोचने की आवश्यकता थी। खैर इसको हम छोड़ गए। परंतु बिहार समझने के लिए बिहार की परंपरा को समझने की आवश्यकता है। आज क्या है, इसको मैं ध्यान नहीं दूंगा। आज इस मंच से बोलने का विषय भी नहीं है। परंतु आप यहां आए हैं और यहां तीन-चार दिन रहने वाले हैं और मिलकर बिहार समझने का प्रयास आप करेंगे, प्रयोग करेंगे। समझना चाहिए, जरूर समझना चाहिए जैसे कि अन्य प्रदेशों में हम जाते हैं और उसे समझने का हमारा प्रयास होता है।
 
‘एक-दूसरे को न जानते हुए भी हमारा नाता’
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कहा कि जब भी हमारे देश में कुछ होता है तो हमको लगता है। कश्मीर में जब कुछ होता है तो कन्याकुमारी में बैठे हुए हमारे भाई-बहन उनको चिंता होती है कि वहां पर अपने जवानों पर आपत्ति क्या आ गई है। हमको कहीं न कहीं दर्द होता है। अभी उत्तराखंड में टनल में जो हादसा हुआ, वहां 41 लोग फंसे हुए थे। तो हम सबको यह चिंता हो रही थी कि क्या हो रहा होगा उनका, रिश्ते से हमारे कोई लगते भी नहीं हैं। किसी को हमने न देखा, उनका नाम भी नहीं जानते हैं। कहां के हैं, वह भी नहीं जानते हैं। परंतु 41 हमारे भाई वहां फंसे हुए हैं, उनके बारे में हमारे सब लोगों के मन में चिंता रहती थी। यह चिंता जो थी न वह एकता का उदाहरण था। हमारा संबंध है, हमारा संकल्प है। इस चिंता को जब हम बाहर लाकर देखते हैं यही तो हमारा संकल्प है यही तो हमारी सूत्र है। यूथ हॉस्टल एसोसिएशन इसी को उजागर करना चाहता है।
 
‘60 परिवारों का हो रहा आगमन’
वहीं, इस मौके पर राज्य इकाई के संरक्षक पूर्व सांसद डॉक्टर अरुण कुमार के द्वारा बिहार राज्य के समस्त पर्यटन स्थल और प्राकृतिक संरचनाओं के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया अंतरराष्ट्रीय स्तर का संगठन है। यह प्रशिक्षण, खोज और जन जागरूकता के लिए जाना जाता है। अध्यक्ष मोहन कुमार ने बताया कि 60 परिवारों का आगमन हो रहा है।

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