फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar News: एलियन जैसे बच्चे का जन्म होते ही अस्पताल छोड़कर भागे परिजन, नवजात को देखने गांव में उमड़ी भीड़

Sat, 29 Mar 2025 09:01 PM IST
पूर्णिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया

सार

Purnea News: पूर्णिया से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां अस्पताल में एक महिला ने एलियन जैसे बच्चे को जन्म दिया। उसके बाद परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल से भाग गए। उसके बाद गांव में लोगों की भीड़ जुट गई और नवजात पर चढ़ावा चढ़ाने लगी। जानें पूरा मामला...।
विज्ञापन
नवजात असामान्य बच्चे को देख चढ़ावा चढ़ाने लगे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पूर्णिया के बनमनखी अनुमंडलीय अस्पताल में एक महिला ने एक दुर्लभ अनुवांशिक विकार से ग्रसित बच्चे को जन्म दिया, जिसे देखकर डॉक्टर और नर्स अचंभित रह गए। बच्चा जन्म से ही असामान्य दिख रहा था, उसकी त्वचा सफेद और जगह-जगह से फटी हुई थी। आंखें और मुंह सामान्य बच्चों की तुलना में बड़े थे और वह अजीब आवाजें निकाल रहा था। जैसे ही ओटी अटेंडेंट ने बच्चे को देखा, उसने हैरानी जताते हुए कहा कि OMG! यह तो एलियन जैसा लग रहा है।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें- Crime:जमशेदपुर के व्यापारी का नालंदा में अपहरण, पुलिस ने दो घंटे में छुड़ाया; पूर्व जवान-csp संचालक गिरफ्तार
 
डर और चमत्कार की मिश्रित प्रतिक्रियाएं
जानकारी के मुताबिक, बच्चे की असामान्यता को देखकर मां और परिजन घबरा गए। जन्म होते ही वे बच्चे को लेकर अस्पताल से भाग गए और घर पहुंचते ही वहां ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटने लगी। स्थानीय लोगों ने इस घटना को किसी दैवीय शक्ति का प्रकोप मान लिया और बच्चे को चढ़ावा चढ़ाने लगे। मामला बनमनखी के काझी वार्ड-8 का है, जहां हाल ही में बच्चे के पिता सियाराम मंडल की मृत्यु हो गई थी।
विज्ञापन



 
डॉक्टरों ने बताया दुर्लभ बीमारी का मामला
डॉक्टरों के अनुसार, यह बच्चा 'हार्लेक्विन इक्थियोसिस' नामक दुर्लभ अनुवांशिक विकार से पीड़ित है। इस स्थिति में त्वचा में तेल बनाने वाली ग्रंथियां नहीं होतीं, जिससे त्वचा फटने लगती है और चेहरा असामान्य लगने लगता है। अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर प्रिंस कुमार ने बताया कि यह बीमारी लाखों में किसी एक बच्चे में पाई जाती है और अब तक दुनियाभर में इसके केवल 300 मामले दर्ज किए गए हैं। ज्यादातर मामलों में, ऐसे बच्चे जन्म के कुछ घंटे या दिनों के भीतर जीवित नहीं रह पाते।
 
बच्चे के इलाज में परिवार ने जताई असमर्थता
चिकित्सकों ने बच्चे के बेहतर इलाज के लिए उसे बड़े अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी, लेकिन परिवार ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराने से इनकार कर दिया। परिजनों ने कहा कि हमारे पास इलाज के पैसे नहीं हैं। जितने दिन वह जिंदा रहेगा, हम उसकी सेवा करेंगे। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- Bihar Election:बिहार दिवस को छोड़ लालू पर तंज कसने लगे नड्डा; तेजस्वी तो पैदा भी नहीं हुए थे- ऐसा क्यों बोले
 
गांव में आस्था और अंधविश्वास का माहौल
बच्चे की असामान्यता को देखकर स्थानीय लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं। कोई उसे 'भगवान का रूप' बता रहा है, तो कोई 'साक्षात लक्ष्मी' का अवतार कहकर पूजा कर रहा है। कुछ लोग इसे एलियन मानकर अजीबोगरीब कयास लगा रहे हैं। गांव में अब तक हजारों लोग बच्चे को देखने के लिए उमड़ चुके हैं।


 
वहीं, डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी तरह से एक आनुवांशिक विकार है और इसे किसी दैवीय शक्ति से जोड़ना विज्ञान की समझदारी के खिलाफ है। ऐसे मामलों में जनजागरूकता की सख्त जरूरत है ताकि अंधविश्वास की जगह सही चिकित्सा सहायता मिल सके।

 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें