चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर
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चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर ने बिहार के सारण में राहुल गांधी की सदस्यता निरस्त किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया से बातचीत के दौरान शनिवार को उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हुए मुझे ये लगता है कि दो साल की सजा अधिक है। राजनीति में इस तरह के बयान और टिप्पणी लोग एक दूसरे के खिलाफ देते रहते हैं। भाजपा के लोगों को अपने नेता अटल जी की पंक्ति "छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता" याद करना चाहिए और बड़ा दिल दिखाना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को दी नसीहत
पीके ने कांग्रेस पार्टी को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेस के लोगों को पता ही नहीं है कि वे किस लड़ाई में हैं। सिर्फ दिल्ली में संसद तक मार्च करने और ट्वीट करने भर से ये लड़ाई आप नहीं लड़ सकते। ये लड़ाई अगर आपको लड़नी है तो आपको जमीन पर, गांवों में, सड़कों पर उतरना पड़ेगा। कल मैं 20 किमी पैदल चला हूं, मुझे कांग्रेस का एक कार्यकर्ता नहीं मिला जो राहुल गांधी की सदस्यता पर गांवों में लोगों को बता रहा हो कि ये गलत हुआ है। जबतक विपक्षी दलों की लड़ाई चुनावी नतीजों में नहीं दिखेगी, तबतक कोई आपको गंभीरता से नहीं लेगा।
क्या है मोदी उपनाम विवाद और क्यों मिली राहुल गांधी को सजा?
कांग्रेस पार्टी वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने साल 2019 में एक चुनावी सभा के दौरान ‘मोदी’ सरनेम को लेकर कथित तौर पर कहा था कि आखिर सभी चोरों के नाम मोदी कैसे हैं? इसे लेकर गुजरात बीजेपी के एक विधायक पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी पर मानहानी का मुकदमा कर दिया था। शिकायतकर्ता पूर्णेश के वकील ने दावा किया, राहुल गांधी के भाषण की फुटेज से साबित होता है कि उन्होंने वाकई में ऐसी टिप्पणी की थी। और उनके शब्दों ने मोदी समुदाय को बदनाम किया था।
वहीं, राहुल गांधी ने कोर्ट में कहा कि मैंने किसी समुदाय को बदनाम करने के लिए कोई बयान नहीं दिया था। किसी को हानि पहुंचाने का मेरा कोई भी इरादा नहीं था। मेरा उद्देश्य सिर्फ भ्रष्टाचार को उजागर करना था।