पटना में जल संसाधन विभाग की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नहरों का पानी हर गांव और खेत तक निर्बाध रूप से पहुंचाना अभियंताओं की जिम्मेदारी है। इस बैठक में सिंचाई से जुड़े विभिन्न प्रक्षेत्रों की प्रगति की समीक्षा की गई और कार्यों में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
पटना में आयोजित हुई राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक
पटना में 26 मई 2025 को जल संसाधन विभाग के सभा कक्ष में एक महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने की। बैठक की शुरुआत मंत्री और विभाग के प्रधान सचिव द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद वाल्मी शासी परिषद के परामर्शी अध्यक्ष ईश्वर चंद्र ठाकुर ने स्वागत भाषण दिया। बैठक में विभाग के विभिन्न प्रक्षेत्रों से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान भौतिक और वित्तीय प्रगति, नहरों के अंतिम छोर तक जल आपूर्ति की स्थिति, भू-अर्जन से संबंधित लंबित मुद्दों और प्रगति यात्राओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सिवान, मोतिहारी, दरभंगा, सहरसा, भागलपुर, बिहारशरीफ, गया, औरंगाबाद और डिहरी जैसे प्रक्षेत्रों में चल रही योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
यह भी पढ़ें- Bihar: 15 जून तक गेहूं की खरीद का मौका, 48 घंटे में मिलेगा भुगतान; किसानों को मिलेगा 2425 रुपये प्रति कुंतल
‘किसानों को सुलभ सिंचाई सुविधा देना हमारा मूल दायित्व’
मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि जल संसाधन विभाग का मूल दायित्व राज्य के किसानों को सुलभ और प्रभावी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सुविधा प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। मंत्री ने सभी मुख्य अभियंताओं को सख्त निर्देश दिए कि वे अपने कार्यों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार रहें। उन्होंने कहा कि नहरों में पानी का प्रवाह हर गांव और हर खेत तक निर्बाध रूप से पहुंचना चाहिए। इसके लिए आगामी सिंचाई मौसम से पहले सभी स्थल निरीक्षण गंभीरता से पूरे कर लिए जाएं। मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर इस दौरान कोई खामी सामने आती है, तो इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आमने-सामने की बैठक से संवाद बेहतर होता है और इससे जमीनी समस्याओं को समझने में मदद मिलती है, जिससे कार्यों की प्रगति में तेजी आएगी।
लापरवाह संवेदकों और अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सख्ती से मुख्य अभियंताओं को निर्देश दिया कि कार्यों में कोताही बरतने वाले संवेदकों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। जिन संवेदकों ने कार्यों में अनियमितता, लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता किया है, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि हर किसान को समय पर सिंचाई सुविधा मिले और इसके लिए विभागीय जवाबदेही भी उतनी ही सुनिश्चित होनी चाहिए। वहीं, प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने भी अधिकारियों से उच्चतम स्तर की सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने की अपेक्षा की। उन्होंने बताया कि राज्य में 37 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजित की जा चुकी है, जिसे शत-प्रतिशत लागू करना विभाग का प्राथमिक उद्देश्य है। उन्होंने सभी कार्ययोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया। प्रधान सचिव ने सख्त चेतावनी दी कि अगर किसी क्षेत्र में नहर के बांध टूटने या जलप्लावन की स्थिति उत्पन्न होती है, तो संबंधित कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता और मुख्य अभियंता के खिलाफ जिम्मेदारी तय कर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें- Bihar News: ‘ऑपरेशन सिंदूर हमारी संस्कृति की विरासत, बिहार है देवभूमि’, भागवत कथा के दौरान बोले अनिरुद्धाचार्य
स्थल निरीक्षण का रूटमैप तैयार करने का निर्देश
बैठक के दौरान प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने सभी अधिकारियों को अगले एक सप्ताह के भीतर अपने क्षेत्रों के लिए नहरवार स्थल निरीक्षण का विस्तृत रूटमैप तैयार करने और समर्पित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है कि नहरों का पानी अंतिम छोर तक पहुंचे, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। बैठक के समापन पर तकनीकी परामर्शी रविंद्र कुमार शंकर ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर विभाग के अपर सचिव नवीन, अपर सचिव पवन कुमार सिन्हा, अभियंता प्रमुख (मुख्यालय) शरद कुमार, अभियंता प्रमुख (सिंचाई सृजन) अवधेश कुमार, मुख्य अभियंता (योजना एवं मॉनिटरिंग) ब्रजेश मोहन सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।