राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को बिहार हथियार बरामदगी मामले में एक और आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। दरअसल, साल 2019 में प्रदेश के पूर्णिया इलाके से सेना के इस्तेमाल में आने वाले घातक हथियार बरामद किए गए थे। जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई घातक और प्रतिबंधित हथियारों और गोला-बारूद की रोकथाम के तहत की है। जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि झारखंड के चतरा निवासी भीखन गंजू उर्फ दीपक कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मंगलवार को विशेष एनआईए अदालत, पटना में आरोप पत्र दायर किया गया था। उन्होंने बताया कि एनआईए ने कुल आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है, जिसने अब तक मामले में नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जानकारी के मुताबिक, बिहार पुलिस ने सात फरवरी, 2019 को म्यांमार सीमा पार से तस्करी किए जा रहे अत्यधिक परिष्कृत अवैध हथियारों की एक खेप को पकड़ने के बाद एक प्राथमिकी दर्ज की थी। इस खेप में अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर और बड़ी संख्या में 5.56x45 मिमी गोला-बारूद शामिल था। इसे देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए माओवादियों और संगठित आपराधिक सिंडिकेट के सदस्यों को आपूर्ति के लिए ले जाया जा रहा था।
मामला मूल रूप से आरोपी सूरज, वीआर काहोरंगम, क्लीयरसन काबो, मुकेश सिंह, संतोष और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। बाद में इसे 28 फरवरी, 2019 को एनआईए ने अपने अधीन ले लिया और फिर से पंजीकृत किया। इससे पहले, एनआईए ने अगस्त 2019, नवंबर 2019 और मार्च 2020 में आरोप पत्र दायर किए थे।
जांच एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा कि जांच से पता चला है कि गंजू तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) का जोनल कमांडर है। उसे आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1908 की धारा 16 के तहत झारखंड सरकार द्वारा आतंकवादी गिरोह/गैरकानूनी संघ घोषित किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि गंजू झारखंड में कोयला ट्रांसपोर्टरों और ठेकेदारों को घातक हथियार रखने वाले कैडरों के जरिए हत्या या गंभीर चोट की धमकी देकर लेवी वसूलने में शामिल था। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि जांच से पता चला है कि गंजू झारखंड में टीपीसी की पकड़ मजबूत करने और आतंक और हिंसा फैलाने के लिए सह-आरोपी से हथियार और गोला-बारूद खरीद रहा था।