महात्मा बुद्ध की पूजा-अर्चना के दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा अन्य लोग
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बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बोधगया में भगवान बुद्ध के दर्शन-पूजन के बाद मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने भगवान बुद्ध की शांति और करुणा की राह पर चलते हुए समतामूलक समाज की स्थापना और समावेशी विकास का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी सिलसिले में बौद्ध सर्किट का तेजी से विकास किया गया है, जिससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बल मिला है, बल्कि राज्य में रोजगार के नए द्वार भी खुले हैं।
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‘बुद्ध सर्किट से जुड़े स्थलों को जोड़ने का कार्य अंतिम चरण में’
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में बौद्ध स्थलों की ऐतिहासिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा अरबों रुपये की लागत से फोरलेन सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। ये सड़कें बौद्ध सर्किट को सुगमता से जोड़ने का काम करेंगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इन पवित्र स्थलों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत पांच प्रमुख सड़कों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिनमें से कुछ मार्गों पर इस वर्ष के अंत तक आवागमन शुरू हो जाएगा।
इन सड़कों में पटना-गया-डोभी रोड, आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे, पटना रिंग रोड का रामनगर से कच्ची दरगाह खंड, दरियापुर-मनिकपुर-साहेबगंज-अरेराज-बेतिया मार्ग तथा गया-हिसुआ-राजगीर-नालंदा-बिहारशरीफ सड़क प्रमुख रूप से शामिल हैं।
‘धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला संबल’
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि बौद्ध सर्किट के तहत भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों को आपस में जोड़ने से धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय युवाओं और व्यवसायियों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बौद्ध परंपरा से जुड़े महत्त्वपूर्ण स्थलों की पहचान कर उनके समग्र विकास की योजना भी सरकार के एजेंडे में है।
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सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा कर कहा कि एनडीए सरकार ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को व्यवहार में उतारते हुए सामाजिक समरसता और सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि बिहार, जो भगवान बुद्ध की तपोभूमि रही है, आज फिर उसी आध्यात्मिक परंपरा को आधार बनाकर आगे बढ़ रहा है।