राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष और पटना हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही ने उपभोक्ता हितों को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए आयोग पूरी तरह कटिबद्ध है। वे अपने सम्मान में आयोजित अभिनंदन समारोह सह उपभोक्ता संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह आयोजन राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के नवनिर्मित भवन में किया गया, जिसमें कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी बात रखी और उपभोक्ता कानून के महत्व पर प्रकाश डाला।
‘उपभोक्ता हित सर्वोपरि’
न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही ने अपने संबोधन में उपभोक्ता हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करना हमारा कर्तव्य है और इसके लिए आयोग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायतों को समयबद्ध तरीके से हल करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। इस दौरान उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में आयोग की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया और कहा कि यह सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य है कि किसी भी उपभोक्ता को अपने अधिकारों के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
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‘दो साल में होगा लंबित मामलों का निपटारा’
कार्यक्रम की शुरुआत में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि आयोग उन उपभोक्ताओं के मामलों को प्राथमिकता के साथ निपटाने में जुटा है, जो वर्षों से न्याय के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि आयोग में लंबित सभी मामलों का निपटारा अगले दो वर्षों के भीतर कर लिया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली को और तेज करने का संकल्प लिया है, ताकि उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द राहत मिल सके।
‘पुराने मामलों पर प्राथमिकता की जरूरत’
पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने अपने संबोधन में पुराने मामलों के निपटारे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को समय पर न्याय मिल सके। उन्होंने आयोग की इस पहल की सराहना कर कहा कि यह कदम उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पुराने मामलों के समाधान के लिए विशेष सुनवाई और तेज प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत हो।
उपभोक्ता कानून में व्यापक बदलाव
कार्यक्रम में महाधिवक्ता पीके शाही ने उपभोक्ता संरक्षण कानून के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1986 के उपभोक्ता कानून में समय के साथ बहुत व्यापक बदलाव हुए हैं। इन बदलावों ने जिला फोरम और आयोग की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में उपभोक्ता संरक्षण के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें जिला फोरम और आयोग उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की सलाह भी दी।
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कानून की बारीकियों पर चर्चा
न्यायमूर्ति डॉ अंशुमान ने अपने संबोधन में उपभोक्ता कानून की बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण कानून उपभोक्ताओं को न केवल उनके अधिकारों की रक्षा करने का अवसर देता है, बल्कि उन्हें एक मजबूत मंच भी प्रदान करता है, जहां वे अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने इस कानून के विभिन्न प्रावधानों और उनके व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा की, जिससे उपभोक्ता अपनी समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें।