राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नालंदा संसदीय क्षेत्र से सांसद कौशलेंद्र कुमार को फिर प्रत्याशी बनाया गया है। इसे लेकर नालंदा जदयू की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार जताया गया है। कहा गया है कि लोकप्रिय नेता जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के प्रति नालंदा जिला जनता दल यूनाइटेड का हर कार्यकर्ता आभार प्रकट करता है और धन्यवाद देता है।
दरअसल, जनता दल यूनाइटेड के जिला अध्यक्ष मो. अरशद, मुख्य प्रवक्ता धनंजय कुमार देव और नगर जिला अध्यक्ष गुलरेज अंसारी ने रविवार को बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि सांसद कौशलेंद्र कुमार कार्यकर्ता से सांसद बनकर संगठन के लिए काम करते हुए नेता नीतीश कुमार जी के नीतियों और सिद्धांतों पर चलकर क्षेत्र का विकास करने में हमेशा लगे रहते हैं। नालंदा वासियों की सेवा में हमेशा तत्पर रहते हैं। उनकी सुनते हैं, समस्याओं का निराकरण करते हैं। हमारी पार्टी हमेशा कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का काम करती रहती है। पार्टी का हर एक कार्यकर्ता नीतीश कुमार है और नालंदा का मतलब ही नीतीश कुमार है। उन्होंने कहा कि इस लोकसभा चुनाव में एनडीए समर्थित जदयू उम्मीदवार रिकॉर्ड मतों से विजय प्राप्त करेंगे। कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है।
इस अवसर पर बधाई देने वालों में वरिष्ठ नेता राजेंद्र प्रसाद, रविकांत कुमार, सोनी लाल, जयराम सिंह, अरविंद पटेल, अजय चंद्रवंशी, नवीन मांझी, संजय कुशवाहा, मुकेश सिंह, सन्नी पटेल, बबलू पटेल, वसुंधरा कुमारी, कुंदन कुमार, अनूप सिंह पटेल, इमरान रिजवी, जनार्दन पंडित, शैलेंद्र गराई, छात्र नेता आदित्य कुमार, संजीत यादव, पवन शर्मा और राकेश मुखिया ने बधाई और शुभकामनाएं दीं।
कौन हैं नालंदा से सासंद के प्रत्याशी
जदयू के कौशलेंद्र कुमार को 2009 में नालंदा निर्वाचन क्षेत्र के सांसद के रूप में चुना गया। उन्होंने 2014 में 16वीं लोकसभा चुनाव में सीट को सफलतापूर्वक बरकरार रखा। वहीं, 2019 में तीसरी बार नालंदा का सांसद बन उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई। चौथी बार फिर इन्हें नालंदा से लोकसभा के लिए जदयू द्वारा प्रत्याशी बनाया गया है।
मुख्य रूप से एक कृषिविद्, कौशलेंद्र कुमार कृषि और सामाजिक सुधार के समर्थक हैं। उन्होंने एसपीएम कॉलेज नालंदा, बैचलर ऑफ आर्ट्स के साथ मगध विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के वैध अधिकारों के लिए अभियान चलाया और संघर्ष किया। वह ब्रॉड गेज रेल ट्रैक और किसानों के लिए एक पान (बीटल) अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए जन आंदोलन में सक्रिय भागीदार रहे। उन्होंने उदेरस्थान, पुनपुन-मोहने नदी परियोजना के लिए भी अभियान चलाया और संघर्ष किया।