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Bihar: मंत्री सुधाकर सिंह ने कराई नीतीश सरकार की किरकिरी, कहा- हमारे विभाग के लोग चोर हैं और हम चोरों के सरदार

Tue, 13 Sep 2022 11:19 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने कहा कि हमारे ऊपर भी और कई सरदार मौजूद हैं। उन्होंने कहा, ये वही पुरानी सरकार है। इसके चाल चलन पुराने हैं। हम लोग तो कहीं कहीं हैं लेकिन जनता को लगातार सरकार को आगाह करना होगा। 
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सुधाकर सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीएम नीतीश कुमार की सरकार पर विपक्ष अक्सर भ्रष्टाचार को लेकर सवाल करता है। लेकिन सीएम नीतीश के एक मंत्री ने खुद अपने विरोधी खेमे को बड़ा मुद्दा दे दिया है। बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने कहा कि कृषि विभाग में कई चोर लोग हैं और हम चोरों के सरदार हैं। कृषि मंत्री सुधाकर सिंह 'चावल गबन' को लेकर भी विवादों में आ चुके हैं।

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राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह रविवार को कैमूर के चांद में मंत्री बनने पर अपने सम्मान समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे। सीएम पर हमला बोलते हुए सुधाकर ने कहा कि मैं सरकार से धान खरीदने के लिए कई एजेंसियों को शामिल करने के लिए कह रहा हूं, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई है। मैं नौकरशाहों की नहीं बल्कि बड़े राजनेताओं की बात कर रहा हूं। 

हमारे ऊपर भी और कई सरदार मौजूद हैं
कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने कहा कि हमारे ऊपर भी और कई सरदार मौजूद हैं। उन्होंने कहा, ये वही पुरानी सरकार है। इसके चाल चलन पुराने हैं। हम लोग तो कहीं कहीं हैं लेकिन जनता को लगातार सरकार को आगाह करना होगा। 
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बोले बयान पर कायम हूं
कृषि मंत्री ने कहा, मैंने जो कहा है उस पर कायम हूं। मैं अपने बयान में कोई भी संशोधन नहीं कर रहा हूं। इससे आगे मुझे कुछ नहीं कहना है। जनता ने मुझे चुना है और उनके लिए संघर्ष करता रहूंगा। 

सरकार के पुतले फूंकते रहिए
कार्यक्रम के दौरान कुछ किसानों ने विभाग में भ्रष्टाचार के बारे में शिकायत की थी। कृषि मंत्री ने कहा कि वह जनता से संबंधित मुद्दों को उठाते रहे हैं, और अधिकारियों की खराब प्रतिक्रिया के लिए नौकरशाही पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अधिकारी देखते हैं कि राजनीति किस तरफ मुड़ रही है और उसी के अनुसार अपनी निष्ठा तय करें।

सुधाकर ने सुझाव दिया कि किसान अपने गुस्से में सरकार का पुतला जलाते रहें। मेरे ऊपर अन्य लोग हैं। जब मैं कैबिनेट की बैठकों में बोलता हूं, तो वे सोचते हैं कि यह मेरी समस्या है। आप अपनी आवाज कब उठाएंगे? यह सुना जाएगा।

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