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बदलेगा जदयू का चुनाव चिन्ह, कार्यकारिणी में बनी सहमति

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जदयू का चुनाव चिह्न ‘तीर’ की जगह जल्द ही ‘चक्र’ हो सकता है। पार्टी की रविवार को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चुनाव चिह्न बदलने केलिए प्रस्ताव पारित हुआ।
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जदयू ने इस सिलसिले में चुनाव आयोग से बातचीत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष शरद यादव को अधिकृत किया है। जदयू का कहना है कि पार्टी का चुनाव चिह्न झामुमो और शिवसेना से मिलता जुलता है।

इस कारण बिहार विधानसभा चुनाव में उसे जबर्दस्त घाटा उठाना पड़ा। इन दोनों दलों का राज्य में खास अस्तित्व न होने के बावजूद इन्हें करीब डेढ़ लाख मत मिले।

चुनाव आयोग को नहीं है आपत्ति

पार्टी महासचिव केसी त्यागी ने बताया कि बैठक के पहले दिन चुनाव निशान बदलने पर सहमति हुई। इससे संबंधित प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। इस मामले में पहले भी जदयू नेता ने चुनाव आयोग से मुलाकात की थी।

त्यागी ने बताया कि आयोग को चिह्न बदलने पर आपत्ति नहीं है। बैठक में निकट भविष्य में असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे उन राज्यों पर भी चर्चा हुई, जहां निकट भविष्य में चुनाव होने वाले हैं।

पार्टी ने इन राज्यों में भाजपा विरोधी फ्रंट खड़ा करने पर जोर दिया है। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता श्याम रजक उपस्थित नहीं थे। रजक मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से खासे नाराज हैं

नाराज चल रहे हैं पार्टी के ये चेहरे

सरकार में मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज चल रहे जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने खुद को पार्टी में भी अनुपयोगी करार दे दिया है।

रजक ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य होने के बावजूद बैठक में शामिल होने से परहेज किया है। उन्होंने कहा कि वो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे।

रविवार को मीडिया से बात करते हुए रजक के चेहरे पर नाराजगी और असंतोष का भाव स्पष्ट तौर पर दिखा। हालांकि उन्होंने इसे अपनी बातों में जाहिर नहीं होने दिया।
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मैं तो एक सामान्य विधायक हूं

नीतीश कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज चल रहे रजक ने नाराजगी भरे लहजे में कहा कि उन्हें मंत्री पद न मिलने का कोई अफसोस नहीं है, क्योंकि ऊपर वाले की कृपा से वो बहुत कुछ पा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि मेरी उपयोगिता अभी विधानसभा क्षेत्र में ही है। जहां तक पार्टी का सवाल है, तो पार्टी में बड़े सक्षम और काबिल लोगों की कमी नही हैं। बैठक में पार्टी के सक्षम व विश्वासी नेताओं का जाना जरूरी रहता है, वो एक सामान्य विधायक हैं।

उनके जाने न जाने से बहुत फर्क नहीं पड़ता है। इस कारण वो अपने आप को पटना और अपने क्षेत्र में ही सीमित कर रखा है। वैसे उन्होंने माना कि उन्हें पार्टी की ओर से न्योता भी मिला और फोन भी आया था, लेकिन वो नहीं जा गए।
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