बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग को ठंढे बस्ते में डालने को लेकर कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा है कि ऐसा उसकी ‘स्वाभाविक साथी’ के प्रभाव में किया गया है।
राज्य में भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद नीतीश के कांग्रेस के साथ जाने की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन राजद-कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना मजबूत होने के बाद वह अलग-थलग पड़ते दिख रहे हैं।
विशेष दर्जे की मांग को लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन के मसले पर लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के साथ उनकी कोई बात नहीं हुई है।
हालांकि उन्होंने आगे कहा कि राजनीति संभावनाओं का खेल है।
यूपीए-कांग्रेस की मजबूरी है, लालू यादव जरूरी हैं?
नई दिल्ली से पटना पहुंचे नीतीश ने कहा कि वित्त सचिव की बैठक में विशेष राज्य के मुद्दे को अभी किनारे रखने की बात सामने आई है, जिससे लगता है कि कांग्रेस ने राजनीतिक मजबूरी में अपना मन बदल लिया है।
उन्होंने कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के राजनीतिक संबंध से इनकार करते हुए कहा कि विशेष राज्य के दर्जे को लेकर हाल के दिनों में सत्ताधारी दल के साथ मुलाकातें हुईं।
कांग्रेस-राजद के बीच संभावित गठबंधन के बारे में उन्होंने कहा कि अगर ये पार्टियां एक साथ न होती तब उनको आश्चर्य होता।