बिहार की नीतीश सरकार जल्द ही सभी विधायकों को एक खास तोहफा देने वाली है। सरकार ने निर्णय लिया है कि राज्य के सभी 243 विधायकों को माइक्रोवेव गिफ्ट किया जाएगा। इसकी व्यवस्था शिक्षा विभाग की ओर से की जाएगी। यही नहीं विधानसभा के इस बजट सत्र में विधायकों को सूटकेस और मोबाइन फोन भी गिफ्ट किए जा चुके हैं।
दो दशक बाद सरकारी महकमों ने अब विधायकों के लिए झोली खोल दी है। एनडीटीवी की खबर के अनुसार लगभग सभी सरकारी विभागों ने जनता के हित में विधानसभा में सवाल पूछने और उनके मुद्दे उठाने के लिए विधायकों का धन्यवाद देने के लिए उपहार देने की व्यवस्था की है।
इस अजीब परंपरा के पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि विधायकों के इस कार्य से विभागों को जरूरतमंद क्षेत्रों का विकास करने के लिए बजट की व्यवस्था करने में मदद मिलती है।
विधायकों को उपहार बांट रहे सरकारी विभाग
बजट सत्र के बाद अब सभी विभागों ने विभिन्न दिवसों पर विधायकों को धन्यवाद स्वरूप उपहार देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिहार शिक्षा विभाग की ओर से जो माइक्रोवेव विधायकों को दिया जाएगा उसकी औसतन कीमत 11,125 रुपये है। सभी 243 विधायकों को माइक्रोवेव देने का कुल खर्चा लगभग 30 लाख रुपये के करीब बैठेगा।
इस संबंध में बिहार के शिक्षा मंत्री और कांग्रेस नेता अशोक चौधरी बड़ी बेतकल्लुफी से कहते हैं कि 'यह केवल 30 लाख रुपये का तो मामला है। कृप्या इसे ज्यादा उछालिए मत। इसे वेतन, स्कूलों के हालात और शिक्षकों की कमी से जोड़ना कतई जायज नहीं है।' हम यह इसलिए दे रहे हैं कि जब विधायक अपने दूर दराज के क्षेत्रों में जाएं तो उन्हें गर्म भोजन मिल सके।
चौधरी तर्क देते हैं कि यह लंबे समय से हो रहा है इसमें कुछ भी नया नहीं है। हम सब विभागों के सहायक हैं, जो फिलहाल मुनाफे में हैं इसलिए वो हमें यह उपहार दे सकते हैं।
डिप्टी सीएम का तर्क 'गरीब हैं हमारे विधायक'
हालांकि इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पक्ष तो नहीं पता चल सका लेकिन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव कहते हैं कि बिहार एक गरीब राज्य है। यहां जो लोग निर्वाचित होकर आए हैं वो कोई करोड़पति नहीं गरीब ही हैं, ऐसे में उन्हें अगर कुछ उपहार दिया जाता है तो क्या गलत है। प्लीज ऐसे मुद्दों को ज्यादा तूल मत दीजिए।
वहीं पूर्व उप मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी के एक करीबी सूत्र ने बताया कि उन्होंने कुछ साल पहले इसमें संसोधन का एक सुझाव दिया था कि सभी विभाग इसके लिए एक समूह बनाएं और फिर एक बार में विधायकों को अपने उपहार दें। लेकिन निजी हितों के चलते इस सुझाव को ज्यादा अहमियत नहीं दी गई।