वैशाली में बुधवार को सुबह से हुई मूसलाधार बारिश ने जिला मुख्यालय हाजीपुर की नगर व्यवस्था की पोल खोल दी। शहर के कई प्रमुख मार्ग और मोहल्ले तालाब में तब्दील हो गए, जिससे आमजन को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। नगर परिषद के पूर्व में किए गए दावों की असलियत बारिश के पहले ही झोंके में सामने आ गई।
जलजमाव ने बढ़ाई शहरवासियों की मुश्किलें
हाजीपुर के अस्पताल रोड, गांधी चौक, सिनेमा रोड, बौलिया रोड जैसे प्रमुख इलाकों में बारिश के कुछ ही घंटों बाद सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। गांधी चौक से अस्पताल रोड तक की दूरी तय करना आमजन के लिए किसी संघर्ष से कम नहीं रहा। सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर जलजमाव के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
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शहर की हालत यह रही कि बाइक सवार, रिक्शा चालक और पैदल चलने वाले सभी लोग कीचड़ और पानी से जूझते नजर आए। बारिश से पहले नगर परिषद द्वारा दावा किया गया था कि सभी नालों की सफाई कर ली गई है, लेकिन जमीनी सच्चाई इसके एकदम उलट साबित हुई।
जर्जर सड़कों और कीचड़ ने बिगाड़ा हालात
हाजीपुर शहर की सड़कों की हालत पहले से ही खस्ताहाल थी। बारिश ने इस संकट को और भी भयावह बना दिया। सुभाष चौक से रामप्रसाद चौक के बीच सड़क पर इतना कीचड़ हो गया कि राहगीरों का निकलना तक मुश्किल हो गया। कुछ इलाकों में राहगीर फिसलकर चोटिल भी हो गए। अस्पताल रोड से थाना चौक और मड़ई रोड से रामप्रसाद चौक तक का इलाका पूरी तरह कीचड़ और जलजमाव की चपेट में आ गया।
अधूरा सीवरेज प्रोजेक्ट बना समस्या की जड़
हाजीपुर नगर की गंदगी और जल निकासी की समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 2010 में स्वीकृत हुआ सीवरेज ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट अब तक अधूरा ही है। नेशनल गंगा बेसिन ऑथोरिटी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 113 करोड़ 62 लाख रुपये का आवंटन दिया था। यह योजना बाद में बढ़कर 125 करोड़ से भी ऊपर चली गई और आज तक जनता को राहत नहीं दे सकी। दिसंबर 2011 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को 2013 तक पूरा करना था, लेकिन आज तक इसका लगभग 60% काम अधूरा है।
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चीन की कंपनी ट्राइटेक (बीजिंग) के द्वारा शुरू किया गया यह कार्य बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BUIDCo) की देखरेख में चला। लेकिन बार-बार समय सीमा बढ़ाए जाने और चेतावनियों के बावजूद प्रगति नहीं हो सकी। 2017 के बाद काम पूरी तरह ठप हो गया। अब कई वर्षों बाद फिर से बुडको को इस योजना को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन हकीकत में शहरवासी अब भी उसी जलजमाव और गंदगी के दलदल में फंसे हुए हैं।