बिहार के मुजफ्फरपुर की साइबर पुलिस की टीम ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा किया है। जांच में पता चला है कि गिरोह के सदस्यों ने खुद को सीबीआई और पुलिस अधिकारी बताकर रागिनी देवी को फोन किया।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से साइबर अपराधी पुलिस अधिकारी बनकर आम लोगों को लगातार फोन कर रहे हैं। इस दौरान शातिर अपराधी परिवार के किसी सदस्य की गिरफ्तारी की बात कहकर लोगों को डराते हैं और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करते हैं।
इसी क्रम में रागिनी देवी नाम की महिला को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय व्हाट्सएप नंबरों से फोन किया गया। कॉल करने वालों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और पुलिसकर्मी बताया। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे कुल 3,47,999 रुपये की ठगी कर ली गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई अन्य म्यूल खातों की जानकारी मिली है। इन खातों से जुड़े मामलों में ओडिशा, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
साइबर पुलिस की टीम ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और विभिन्न बैंकों में इस्तेमाल किए गए म्यूल खातों का विश्लेषण किया। इसके बाद ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खाते के धारक की पहचान टीपू कुशवाहा के रूप में हुई। पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बरियारपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी है।
वहीं, इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए साइबर डीएसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के बैंक खाते के खिलाफ अन्य राज्यों से भी शिकायतें दर्ज मिली हैं। यही नहीं, उसके खाते के जरिए साइबर ठगी के अन्य मामलों में भी लेन-देन होने की आशंका है। पुलिस आरोपी के आपराधिक इतिहास और अन्य संभावित कड़ियों की जांच कर रही है। साइबर ठगी में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड