मोतिहारी जिले के रक्सौल अनुमंडल के हरपुर थाना क्षेत्र में जुए का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें आरोपी अज्ञात जुआरियों और संचालक को बनाया गया है। हरपुर थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष विश्वजीत कुमार द्वारा उक्त वायरल वीडियो के सत्यापन का कार्य चल रहा है और जुआरियों की पहचान भी की जा रही है। वैसे यह वायरल वीडियो कचुरबारी गांव के बांसवाड़ी में जुआ खेलने का बताया जा रहा है, जिसके सत्यापन में पुलिस लगी हुई है।
वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां प्रतिदिन 40 से 50 लाख रुपये का दांव रोज होता है। इसमें स्थानीय जुआरियों के साथ ही नेपाल से भी लोग जुआ खेलने आते हैं। नेपाली जुआरियों को मोटा आसामी माना जाता है। यहां जुआ का अड्डा वर्षों से चल रहा है और यह पहली बार है कि अज्ञात पर ही सही लेकिन कुछ न कुछ कार्रवाई तो हुई है। वैसे इन जुआरियों और जुआ अड्डे के संचालक का हाथ भी लंबा है।
लोगों का यह भी मानना है कि पुलिस जब चाहे छापामारी कर इनको पकड़ सकती थी। अज्ञात प्राथमिकी का कोई मतलब ही नहीं था। माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर जिला एसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने कड़ा रुख अख्तियार किया और इनकी कार्रवाई से बचने के लिए यह खानापूर्ति की गई है। अन्यथा जहां प्रतिदिन लाखों-लाख का जुएं का अड्डा चल रहा हो और अगर पुलिस के संज्ञान में आए तो छापामारी कर कई जुआरियों को पकड़ लिया गया होता। उसके बाद इस मामले में बड़ा खुलासा हो सकता था।
गौरतलब है कि कचूरबाड़ी के पास बांसवाड़ी में नेपाल से भी भारी संख्या में जुआरी पहुंचते हैं। उनके यहां पहुंचने से ही जुआ के इस खेल में रौनक बढ़ जाती है। कारण कि नेपाली जुआरी बड़े-बड़े दांव खेलते हैं और उनसे जुआ संचालक को भारी आमदनी होती है।
नेपाल के नगरों बीरगंज, पोखरा और काठमांडू इत्यादि नगरों में जुए का खेल रजिस्टर्ड कैसिनो में होता है। लेकिन वहां नेपाली नागरिकों के प्रवेश पर रोक है, जिस कारण भारतीय क्षेत्र में गैरकानूनी जुए अड्डे पर नेपाली जुआरियों की भारी आवग होती है। यहां आकर जुए में दांव आजमाते हैं और प्रतिदिन अमीर होने की आशा पालकर आने वाले इन जुआरियों को केवल सपना ही हाथ लगता है। प्रतिदिन माल भरकर आते हैं और खाली हाथ होकर लौट जाते हैं।
वैसे जुए के इन अवैध केंद्रों के संचालक बड़े शातिर होते हैं। उनके पास ऐसी बुद्धि होती है कि आज हारा हुआ जुआरी कल जीतने की आशा में किसी भी तरह रुपये का जुगाड़ कर ही लेता है। यही हाल स्थानीय जुआरियों का भी है। इस प्रकार के जुए के अड्डे रक्सौल अनुमंडल क्षेत्र के आधे दर्जन जगहों पर चलते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जब जुए के अड्डों की जानकारी आम लोगों को रहती है तो पुलिस इससे अंजान कैसे बनी रहती है।