बिहार के बेतिया में सक्षमता परीक्षा का विरोध करने पर शिक्षकों का एक सप्ताह का वेतन काट लिया गया है। बताया जा रहा है कि जिले के 108 शिक्षक नेताओं का सात दिन का वेतन शिक्षा विभाग ने काट दिया है। उक्त शिक्षकों ने सक्षमता परीक्षा के विरोध में मशाल जुलूस निकाला था, जिसको लेकर शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। इसमें प्राथमिक शिक्षक संघ से लेकर प्रारंभिक शिक्षक संघ, पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ, टीईटी शिक्षक संघ, परिवर्तनकारी शिक्षक संघ आदि के जिला अध्यक्ष और सचिव भी शामिल हैं।
वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी रजनीकांत प्रवीण ने बताया कि बिहार विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 के तहत नियोजित शिक्षकों की सक्षमता परीक्षा के लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के परीक्षा नियंत्रक द्वारा अधिसूचना निकाली गई थी, जिसके विरोध में धरना प्रदर्शन किया गया। साथ ही बैठक और विज्ञप्ति की प्रति को जलाया गया। इसके साथ ही इसके संदेश को इंटरनेट-मीडिया ग्रुप पर प्रसारित करने के मामले में शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। उन्होंने बताया कि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना को यह निर्देश दिया गया है कि काटी गई राशि कोषागार के माध्यम से राज्य सरकार के कोष में जमा कराना सुनिश्चित करेंगे।
इधर, इस मामले में कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना योगेश कुमार ने बताया कि शिक्षकों के विरोध-प्रदर्शन और मशाल जुलूस जैसे दो मामलों में 50 और दूसरे में 58 शिक्षकों का सात दिनों का वेतन काटा गया है। जिन शिक्षक नेताओं का वेतन कटा है, उन शिक्षकों में संतोष कुमार यादव, नर्वोदय ठाकुर, विपिन प्रसाद, शेख निजामुद्दीन, राजेश राय, राजीव रंजन प्रभाकर, विपिन यादव, राहुल राज, सुनील तिवारी, प्रशांत प्रियदर्शी और नंदन कुमार जैसे शिक्षक नेताओं के नाम शामिल हैं।
इनके अलावा शिक्षकों में सतीश कुमार, अंसारुल राजा, अंकित राय, राजू कुमार सिंह, आशीष उपाध्याय, गेन्नालाल शर्मा और अभय कुमार सिंह आदि शिक्षकों के नाम शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, बिहार शिक्षक एकता मंच के बैनर तले विभिन्न संगठन की गतिविधियों में शामिल होने और राज्य सरकार के खिलाफ शिक्षकों को भड़काने के आरोप के तहत इन शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है।