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राम को नहीं मानते मांझी : बिहार के पूर्व सीएम जीतन 'राम' ने उठाए सवाल, बोले- वे भगवान नहीं, सिर्फ रामायण के पात्र

Fri, 15 Apr 2022 10:14 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

मांझी ने यह बात गुरुवार को जमुई में अंबेडकर जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कही। इस कार्यक्रम में उन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए। 
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जीतनराम मांझी - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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अब बिहार के पूर्व सीएम जीतनराम मांझी का विवादित बयान आया है। उनका कहना है कि राम भगवान नहीं हैं, वे तो सिर्फ तुलसीदास व वाल्मीकि रामायण के पात्र हैं। मांझी ने अपने भाषण कई अन्य ऐसी बातें कहीं, जिनसे विवाद खड़ा हो सकता है। 

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मांझी ने यह बात गुरुवार को जमुई में अंबेडकर जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कही। इस कार्यक्रम में उन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए। मांझी ने कहा कि रामायण में अच्छी बातें लिखी हैं, इसलिए हम उसे मानते हैं, पर राम को नहीं जानते। 

उच्च जाति के लोग बाहरी, आज शबरी के जूठे बेर खाकर दिखाएं
बिहार के पूर्व सीएम ने कहा कि पूजा-पाठ करने से कोई बड़ा नहीं होता। अनुसूचित जाति के लोगों को पूजा-पाठ करना बंद कर देना चाहिए। जो ब्राह्मण मांस खाते हैं, शराब पीते हैं, झूठ बोलते हैं, उनसे दूर रहना चाहिए। उनसे पूजा-पाठ नहीं कराना चाहिए। हिंदुस्तान अवाम मोर्चे (हम) के प्रमुख ने यह भी कहा कि आज राम की तरह कोई शबरी के जूठे बेर खाकर दिखाए। हमारे घर खाना खाए। मांझी ने कहा कि सवर्ण और उच्च जाति के लोग भारत के मूल निवासी नहीं हैं, वे बाहरी हैं।
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भाजपा ने साधा निशाना
मामले में भाजपा ने मांझी पर जमकर निशाना साधा। राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम और राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अपने आप को शबरी का 'वंशज' (वंशज) कहना हास्यास्पद है। आप खुद को उनका वंशज कहते हो और उन पर ही संदेह करते हो जिसकी वह पूजा करती थीं। वहीं, राज्य भाजपा प्रवक्ता और ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव निखिल आनंद ने सवाल किया कि क्या मांझी नास्तिक हैं? यदि नहीं तो वह किस भगवान में विश्वास करते हैं।

पहले भी दे चुके हैं ऐसे बयान
यह पहला मौका नहीं है जब मांझी ने राम, सवर्ण, हिंदू धर्म, ब्राह्मण आदि को लेकर ऐसी बातें कही हैं। पहले भी वे कई बार ऐसी बातें कर चुके हैं। गत वर्ष दिसंबर में भी ऐसी बातें कही थीं, जिनके बाद बवाल खड़ा हो गया था। इसके बाद उन्होंने एक और कदम उठाते हुए पटना में ब्राह्मण भोजन रखा था, लेकिन इसकी शर्त यह रखी थी कि जिन ब्राह्मणों ने जीवन में कभी पाप नहीं किया वे ही इसमें शामिल होंगे। इसके बाद एनडीए व भाजपा ने उन्हें समझाइश दी थी। मांझी 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे। 

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