बिहार के चुनावी रण में जदयू-राजद के मुकाबले विजय के लिए बेशक भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री और कभी नीतीश कुमार के विश्वस्त रहे जीतन राम मांझी को अपना प्रमुख सहयोगी मानकर चल रही हो लेकिन भाजपा ने इस दलित नेता को बड़ा झटका देने की तैयारी भी कर ली है।
माना जा रहा है मांझी की पार्टी के सात विधायक जल्द ही पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो आने वाले समय में भाजपा मांझी गठबंधन भी खटाई में पड़ सकता है।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार मांझी की पार्टी हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (हम) के 19 में से सात विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। माना जा रहा है कि ये कभी भी मांझी का हाथ झटककर भाजपा का कमल थाम सकते हैं।
मांझी के दम पर बड़ी लड़ाई की तैयारी में भाजपा
हालांकि ये भी माना जा रहा है कि इससे मांझी के साथ भाजपा के समीकरणों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। बताया जाता है कि 2014 के चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले इन विधायकों को भाजपा की तरह से आश्वस्त किया गया है कि उन्हें चुनावों में उनकी मनचाही सीट से टिकट दिया जाएगा।
हालांकि मांझी की ओर से उन्हें पार्टी में ही रहने के लिए समझाने का प्रयास किया जा रहा है। इनमें से एक विधायक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब 12 विधायकों (मांझी सहित) ने मांझी की हम के साथ रहने का निर्णय लिया तब सात विधायकों ने भाजपा में जाने का फैसला कर लिया।
हालांकि वो ये भी कहते हैं कि इस संबंध में किसी के भी मन में कोई कटुता नहीं है। यह एक व्यवहारिक राजनीति और मांझी की राजनीतिक पार्टी की अपरीक्षित चुनावी ताकत है। भाजपा के भी एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि मांझी की पार्टी के एक दर्जन विधायक उनके संपर्क में हैं।
विधायकों के टूटने से गठबंधन में हल्का रहेगा मांझी का दावा
इनमें से कुछ को जल्द ही पार्टी में शामिल कर लिया जाएगा जिसके बाद उन्हें टिकट का भी आवंटन कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भाजपा राज्य की 243 में से 170 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
हालांकि राजग गठबंधन में अपने तीन सहयोगियों राम विलास पासवान की लोजपा, उपेन्द्र कुशवाहा की आरएलएसपी और मांझी की हम को समाहित करने के लिए ये आंकड़ा ऊपर नीचे भी हो सकता है।
ऐसे में मांझी के विधायकों का उनकी पार्टी से टूटने को इस नजरिए से भी देखा जा रहा है कि इससे मांझी का ज्यादा सीटों पर दावा अपने आप कम हो जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री मांझी भाजपा पर अपने लिए चालीस सीटें छोड़ने का दावा करते रहे हैं। लेकिन इसके बाद उनका दावा हल्का पड़ सकता है।
वहीं, जो विधायक भाजपा का दामन थाम सकते हैं उनमें हैं राजकेश्वर राज (विक्रमगंज), राजीव रंजन (इस्लामपुर), ज्ञानेन्द्र सिंह उर्फ ज्ञानू (बरह), दिनेश कुशवाहा (मीनापुर), नीरज सिंह बबलू (छतरपुर), अजय प्रताप (जमुई) और डा. सुनील (बिहार शरीफ)।