चैलेंजर ट्रॉपी में बांग्लादेश के खिलाफ वैभव ने बेहतर प्रदर्शन किया था।
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वैभव ने सात साल की उम्र से किक्रेट खेलना शुरू किया
कोच और फेमस क्रिकेटर मनीष ओझा ने बताया कि वैभव ने सात साल की उम्र से किक्रेट खेलना शुरू किया। अभिभावकों ने पहले ही तय कर लिया था कि इसे भारतीय टीम के लिए क्रिकेट खेलना है। इसके लिए वह सात साल की उम्र में वैभव को मेरे पास कोचिंग के लिए लेकर आए। एक-एक दिन का गैप देकर वैभव को समस्तीपुर से पटना लेकर आते थे। ठंड हो या गर्मी हर मौसम में वैभव सुबह साढ़े सात बजे से तीन बजे तक फील्ड में प्रैक्टिस करता था। इस साल उसे हेमंत ट्रॉफी मौका मिला है। इसमें वह बिहार से टॉप स्कोरर रहा। इसमें उसमें चार सेंचुरी लगाई। कुल 670 रन बना सुर्खियों में आया। अंडर 19 वीनू मांकड़ ट्रॉपी में लगातार सेंचुरी लगाकर वह चयनकर्ताओं की नजर में आया। इस शानदार प्रदर्शन के आधार पर वैभव का चयन चैलेंजर ट्रॉपी में हुआ। इंडिया बी में उसका चयन हुआ। इंग्लैंड के खिलाफ वैभव ने दो हाफ सेंचुरी लगाई। इस प्रदर्शन के आधार पर उसे रणजी ट्रॉपी में खेलने का मौका मिला। वैभव बाएं हाथ का ओपनर बल्लेबाज है। साथ ही बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी भी करता है।
48 शतक और 3 दोहरा शतक लगाकर वैभव के नाम
किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि समस्तीपुर के ताजपुर प्रखंड का बच्चा आज बिहार ही नहीं पूरे में देश में नाम करेगा। पिछले सीजन में वैभव ने तीन दोहरा शतक लगातार चयनकर्ताओं को सोचने पर विवश कर दिया था। इतना ही नहीं पिछले सीजन में बड़ी टीमों के खिलाफ 48 शतक और 3 दोहरा शतक लगाकर अपने बल्लेबाजी का लोहा पूरे बिहार में मनवाया। इसके बाद हेमंत ट्रॉफी, वीनू मांकड़ ट्रॉफी और चैलेंजर ट्रॉफी में बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए बिहार क्रिकेट एसोसिएशन ने वैभव को रणजी टीम में जगह दी। कोच मनीष ओझा बताते हैं कि वैभव काफी कमाल के बल्लेबाज हैं और बचपन से ही उनका क्रिकेट के प्रति इनका काफी जुनून रहा है.