कोशी क्षेत्र में जमींदारों की समस्याओं को लेकर रविवार को सरडीहा चौक पर कोशी पीड़ित संघर्ष मोर्चा ने एक बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता सत्तौर पंचायत के पूर्व मुखिया नारायण यादव ने की। इसमें कोशी नदी में समाहित जमीन के सरकारीकरण करने का विरोध किया गया।
बैठक में उठाए गए मुख्य बिंदु
कोशी प्राधिकार का गठन: बैठक में वक्ताओं ने बताया कि कोशी क्षेत्र के अंदर बसे लोगों के लाभ के लिए कोशी प्राधिकार का गठन किया गया था। हालांकि, इस प्राधिकार द्वारा मिलने वाले लाभ अभी तक उपलब्ध नहीं हुए हैं।
जमीन का सरकारीकरण: वर्तमान में सरकार ने कोशी नदी में समाहित जमीनों को सरकारीकरण करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे उपस्थित लोगों ने अस्वीकार कर दिया। वक्ताओं का कहना था कि जब तक कोशी प्राधिकार के तहत सभी प्रभावित परिवारों के एक सदस्य को नौकरी नहीं मिलती, तब तक यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता।
किसानों की समस्याएं: वक्ताओं ने सरकार की दोहरी नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कोसी तटबंध के अंदर रैयती जमीन के मालिक किसान लगान दे रहे हैं। बावजूद इसके उन्हें उचित मुआवजा या रेंट नहीं मिल रहा है। इसके कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आंदोलन की तैयारी: बैठक में उपस्थित लोगों ने एक कमिटी का गठन किया, जो सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आंदोलन की दिशा तय करेगी। यह कमिटी सरकार के खिलाफ एक ठोस योजना तैयार करेगी और आंदोलन के लिए रणनीति बनाएगी।
बैठक में कोशी पीड़ित संघर्ष मोर्चा के सचिव अनवार आलम, पूर्व प्रखंड प्रमुख सीता राम साह, पूर्व मुखिया अरुण यादव, सुनील यादव, मो. नौशाद, मो. अली, महाकांत कुमार, वालेश्वर यादव, गजेंद्र यादव, वकील साह और अन्य कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
सभी वक्ताओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाते हुए सरकार से मांग की कि जिनके खेत नदी के पानी के बहाव में समाहित हो गए हैं, उन्हें उचित मुआवजा या रेंट दिया जाए। ताकि वे बिना फसल के भी लगान देने की स्थिति में न हों। वहीं, मौके पर बनी नई कमिटी द्वारा जल्द ही सरकार को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा और आंदोलन की योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।