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Bihar News : राजद विधायक ने नीतीश सरकार को दी एक लाइन की सलाह, जदयू के नए मंत्री भी खफा

Wed, 05 Jul 2023 02:25 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar Result : शिक्षा मंत्री के पीत पत्र का परिणाम बिहार की राजनीति में दिखने लगा है। जदयू कोटे के मंत्री और राजद के विधायक IAS केके पाठक के खिलाफ हो गए। भाजपा भी इस विवाद में कूद पड़ी है।
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नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अपनी सीनियर IPS अधिकारी की गालीबाजी से तंग आकर ट्रांसफर मांगने पर चार महीने से वेटिंग फॉर पोस्टिंग में रहे IPS विकास वैभव को सोमवार को पदस्थापना मिली और मंगलवार को IAS केके पाठक का विवाद सामने आ गया। जिस समय IPS विकास वैभव और उनके साथ रहे DIG विनोद कुमार गालीबाजी से परेशान थे, तभी पाठक का भी गालीबाजी के दो वीडियो वायरल हुए थे। अब IAS पाठक का ताजा विवाद शिक्षा मंत्री ने पीत पत्र से जगजाहिर किया तो जदयू कोटे से नए-नवेले मंत्री बने रत्नेश सदा ने भी मुंह खोल दिया। कसकर बोल दिया। बात बढ़ी तो राजद विधायक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पाठक को हटाए जाने की मांग करते हुए शिक्षा मंत्री को प्रताड़ित किए जाने की बात कह दी। मौका देख भाजपा भी इस विवाद में कूद गई है।

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राजद विधायक ने कहा- शिक्षा मंत्री की फजीहत करवा रहे केके पाठक
भाई वीरेंद्र ने कहा कि शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर की फजीहत करवा रहे हैं केके पाठक। यह एक तरह से प्रताड़ना है। मुख्यमंत्री से अपील है कि फौरन केके पाठक का तबादला कर दिया जाए। जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा अपर मुख्य सचिव केके पाठक अपने अनुभव के आधार पर बेहतर काम कर रहे हैं। वह अब तक जहां भी रहे हैं अच्छा काम किया है। किसी पत्र के बारे में जानकारी नहीं है। 


बिहार सरकार के मंत्री भी खफा
बिहार सरकार के मंत्री रत्नेश सदा ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि केके पाठक दलित विरोधी है। वह सामंती विचारधारा के लोग हैं और शिक्षा विभाग में आने के बाद अपने विचारधारा को लागू करना चाहते हैं। यही कारण है कि महादलित टोले के शिक्षक जो महादलित के बच्चे को पढ़ाते हैं उसको लेकर नया गाइडलाइन जारी कर उनके वेतन में कटौती के आदेश जारी कर दिया। यह काफी गलत है। उन्होंने कहा कि नब्बे प्रतिशत अगर बच्चे की उपस्थिति नही रहेगी तो महादलित टोले के शिक्षक का वेतन काटा जाएगा। यह फरमान कहीं से उचित नहीं है। 

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