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दादरी के बिहार पहुंचने से डगमगा रही JDU की नैया

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दादरी में गो मांस खाने के शक में अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति की बर्बर हत्या मामले के बिहार विधानसभा चुनाव में दस्तक देने से जदयू चिंतित है। इस मामले में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के हिंदुओं के बीफ खाने के दावे के बाद जदयू को चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का डर सताने लगा है।
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लालू के बयान को भाजपा भी अपने लिए बड़ा सियासी अवसर मान रही है। यही कारण है कि पार्टी ने इस बयान के बहाने महागठबंधन को घेरने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

दरअसल महागठबंधन में शामिल जदयू और राजद चुनाव में मुद्दे की गाड़ी का विकास की जगह जाति की पटरी पकड़ लेने से राहत का अनुभव कर रही थी।

महागठबंधन के लिए मुश्किल यह है कि राजद जहां इस मुद्दे को भाजपा की ओर से तूल दिए जाने के बाद हमलावर मुद्रा में पलटवार कर रहा है, वहीं जदयू को इस बयान से सियासी नुकसान की आशंका सता रही है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले महागठबंधन में शामिल कांग्रेस राजद की ओर से चुनाव को अगड़ा बनाम पिछड़ा बताने से असहज कर दिया था।
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लालू संग मंच पर नहीं जाएंगे कांग्रेस नेता

सियासी नुकसान की आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने अपनी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को लालू के साथ मंच साझा करने की स्थिति से बचाने का फैसला किया है।

दूसरी ओर चुनावी मुद्दे की गाड़ी के विकास की जगह जाति की पटरी पकड़ने से चिंतित भाजपा ने लालू के बयान को बड़ा सियासी मुद्दा बनाने की रणनीति तैयार की है। इस रणनीति के तहत चुनाव प्रचार करने वाले नेताओं को जनसभाओं और सोशल मीडिया में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाने का निर्देश दिया गया है।

जदयू के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक राजद सुप्रीमो ने बयान देने में सियासी परिपक्वता नहीं दिखाई। जाति के हथियार के आगे असहज महसूस कर रही भाजपा शुरू से ही सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की इच्छा रखती थी। अब लालू के दावे ने उसे एक सियासी अवसर दे दिया है। उक्त नेता के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान आक्रामक होने पर ज्यादा लाभ मिलता है।

महागठबंधन अब तक आक्रामक था, मगर इस बयान के बाद उसके सामने सफाई पेश करने की स्थिति आ गई है। जदयू सूत्रों ने बताया कि मुश्किल यह है कि राजद इस मामले में बीच का रास्ता निकालने के बदले अपने अध्यक्ष के बयान मामले में राजग पर हमलावर है। इससे भाजपा को मुद्दे को और तूल देने का मौका मिल रहा है।

दूसरी ओर भाजपा के रणनीतिकार लालू के बयान को खुद के लिए एक बड़ा सियासी अवसर मान रहे हैं। रणनीतिकारों को लगता है कि इस बयान से धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण की पूरी गुंजाइश है। यही कारण है कि पार्टी के रणनीतिकारों ने चुनिंदा शीर्ष नेताओं को छोड़कर अन्य नेताओं को लालू के बयान को जनसभाओं, सोशल मीडिया और जनसंपर्क के दौरान लगातार उठाते रहने की हिदायत दी है।

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