पितृपक्ष मेला क्षेत्र में पिंडदान के लिए दुकानों में सजी पूजन सामग्री।
मोक्ष की नगरी गयाजी धाम में 6 सितंबर से पितृपक्ष मेले का आयोजन हो रहा है। देश-दुनिया के कोने-कोने से आने वाले पिंडदानियों को कर्मकांड और तर्पण के लिए कुछ विशेष सामग्रियों की आवश्यकता होती है। पिंडदानियों को मुख्य रूप से तिल, जल, चावल, कुशा, दही, घी, खीर, जौ, मूंग, सफेद फूल, और सत्तू जैसी सामग्रियों की जरूरत होती है। ऐसा माना जाता है कि इन सामग्रियों से पिंडदान करने पर पितर प्रसन्न होते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मुख्य सामग्री
- तिल, जल और चावल: ये पितरों को तर्पण और अर्पण करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
- कुशा: श्राद्ध कर्म में कुशा का उपयोग भी महत्वपूर्ण होता है।
- सत्तू: प्रेतशिला जैसे स्थानों पर कर्मकांड के लिए सत्तू से बने पिंड का उपयोग किया जाता है।
- उड़द, सफेद फूल, केले: इन वस्तुओं का उपयोग पितरों को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।
- गाय का दूध, घी और खीर: ये सामग्रियाँ पितरों की संतुष्टि के लिए विशेष रूप से उपयोग की जाती हैं।
- जौ, मूंग, गन्ना और अन्य खाद्य सामग्री: इन सभी का उपयोग श्राद्ध में किया जाता है।
- गंगाजल: पितृपक्ष में तर्पण के लिए गंगाजल का उपयोग होता है।
- तांबे का लोटा: जल और अन्य सामग्री रखने के लिए तांबे के लोटे का उपयोग किया जाता है।
गयाजी में पिंडदान पूरे साल किया जा सकता है। हालाँकि, गया श्राद्ध या गया पिंडदान मुख्य रूप से 17 दिनों के पितृपक्ष मेले के दौरान किया जाता है, जिसे 7, 5, 3 या 1 दिन के कर्मकांड के रूप में भी संपन्न किया जा सकता है।
पितृपक्ष मेला क्षेत्र में पिंडदान के लिए दुकानों में सजी सामग्री।
पितृपक्ष मेला क्षेत्र में पिंडदान के लिए दुकानों में सजी सामग्री।