पितृपक्ष मेला-2026 के लिए बिहार पर्यटन विभाग द्वारा जारी ऑनलाइन ई-पिंडदान और विशेष पर्यटन पैकेज का गयाजी के पंडा समाज ने कड़ा विरोध किया है। विष्णुपद मंदिर परिसर में पंडा समाज ने कहा कि पिंडदान कोई पर्यटन गतिविधि नहीं, बल्कि सनातन आस्था और मोक्ष से जुड़ा धार्मिक अनुष्ठान है, जिसे ऑनलाइन माध्यम से पूरा नहीं किया जा सकता।
पर्यटन विभाग ने जारी किए विशेष पैकेज
विष्णुपद मंदिर में पंडा समाज ने जानें क्या कहा?
पर्यटन विभाग की इस पहल का गयाजी के पंडा समाज ने खुलकर विरोध किया। बुधवार को विष्णुपद मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में पंडा समाज के लोग एकत्र हुए और प्रेसवार्ता कर सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सरकार को पिंडदान जैसी धार्मिक परंपरा को पर्यटन पैकेज का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए।
गयाजी पर्यटन स्थल नहीं, मोक्ष की नगरी
ऑनलाइन से नहीं मिलेगा पितरों को मोक्ष
पंडा समाज ने ऑनलाइन ई-पिंडदान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पिंडदान कोई वस्तु नहीं है, जिसे ऑनलाइन खरीद लिया जाए। यह पूरी तरह श्रद्धा, विश्वास और धार्मिक परंपरा से जुड़ा अनुष्ठान है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से श्रद्धालु यह कैसे जान पाएंगे कि विष्णुपद मंदिर या अन्य वेदियों पर विधि-विधान से पिंडदान हुआ या नहीं अथवा उनके पूर्वज किस पंडा परिवार से जुड़े थे। ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था से धार्मिक परंपरा और आस्था दोनों प्रभावित होंगी।
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सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग
पंडा समाज ने सरकार से ऑनलाइन ई-पिंडदान व्यवस्था और पर्यटन पैकेज में किए गए प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अन्य व्यवस्थाएं की जा सकती हैं, लेकिन पिंडदान जैसी सनातन धार्मिक परंपरा को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ना उचित नहीं है। पंडा समाज ने चेतावनी दी कि यदि इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो आगे भी विरोध जारी रहेगा।