गयाजी शहर के जीबी रोड स्थित शहीद स्मारक पर तीनों अमर शहीदों की जीवनी अंकित करने की मांग अब रंग लाती दिख रही है। अमर उजाला द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद गया नगर निगम और जनप्रतिनिधियों ने पहल का भरोसा दिया है। उनका कहना है कि स्मारक पर वीरों की जीवनी लिखी जाएगी, ताकि नई पीढ़ी उनके बलिदान और देशभक्ति से प्रेरणा ले सके।
नगर निगम ने दिया आश्वासन
अमर उजाला ने इस मुद्दे पर गया नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर सह स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य अखौरी ओंकारनाथ श्रीवास्तव उर्फ मोहन श्रीवास्तव से बातचीत की। उन्होंने शहीद स्मारक पर जीवनी लिखने के सवाल पर कहा कि नगर निगम ने शहीदों के सम्मान में विशेष पत्थरों से स्मारक का निर्माण कराया है। हालांकि, यह केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार, सांसद और विधायक की भी साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यह मांग उनके संज्ञान में आई है और नगर निगम स्तर पर पहल कर तीनों अमर शहीदों की जीवनी स्मारक पर अंकित कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और बलिदान को जान सकें।
जिला परिषद उपाध्यक्ष ने भी जताई सहमति
युवाओं को मिलेगा प्रेरणा का संदेश
शहर के लोगों का मानना है कि यदि स्मारक पर शहीदों की जीवनी अंकित होती है तो यह केवल सम्मान का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को जीवंत रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे नई पीढ़ी अपने क्षेत्र के वीर सपूतों के त्याग, साहस और देशभक्ति से प्रेरणा ले सकेगी।
शहीद स्मारक पर जीवनी लिखने की उठी मांग
बताते चलें कि गयाजी शहर के जीबी रोड स्थित कोतवाली थाना के पास बने तीन अमर शहीदों जगन्नाथ मिश्रा, भुई राम और कैलाश राम के स्मारक पर उनकी जीवनी अंकित करने की मांग तेज हो गई है। समाजसेवी लालजी प्रसाद ने कहा कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में तिरंगा फहराने के प्रयास में तीनों वीर अंग्रेजों की गोली से शहीद हो गए थे, लेकिन स्मारक पर उनके बलिदान की जानकारी देने वाला कोई बोर्ड नहीं है।
उन्होंने जिला प्रशासन और गया नगर निगम से स्मारक पर तीनों शहीदों की संक्षिप्त जीवनी, उनके योगदान और शहादत का विवरण अंकित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे नई पीढ़ी को स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास और बलिदान की जानकारी मिलेगी तथा शहीदों के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना और मजबूत होगी।
शहीदों के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना और मजबूत होगी।
शहीद स्मारक।