लोगों के बीच बोधगया के दूसरे बुद्ध कहे जाने वाले गांधीवादी व समाजसेवी द्वारिको सुंदरानी का बुधवार को निधन हो गया। पाकिस्तान में जन्मे सुंदरानी ने महात्मा गांधी और विनोबा भावे की प्रेरणा से बोधगया को अपना कार्य क्षेत्र बनाया और गरीबों की नि:स्वार्थ सेवा करते लंबी बीमारी के बाद बोधगया में ही अंतिम सांस ली। उनकी उम्र करीब एक सौ वर्ष बताई जा रही है।
बंटवारे के पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जन्मे द्वारिको सुंदरानी ने भंसाली ट्रस्ट के माध्यम से बोधगया में मोतियाबिंद का नि:शुल्क ऑपरेशन शुरू कराया। वर्ष 1984 से शुरू किए गए इस सेवा शिविर में 2020 तक सात लाख 86 हजार लोगों की आंखों का ऑपरेशन किया जा चुका था।
सुंदरानी को नि:स्वार्थ सेवा के लिए कई सम्मानों से नवाजा गया। उन्हीं की प्रेरणा से पूर्व सीएम जीतनराम मांझी, विधायक कुमार सर्वजीत, ज्योति मांझी आदि ने राजनीति में सफल मुकाम बनाया।