नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना इलाके के दौलतपुर गांव की विधवा महिला ममता देवी की हत्या का खुलासा हो गया है। इस संबंध में घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ सदर 2 हिसुआ सुनील कुमार के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया। तकनीकी एवं मानवीय सूचना के आधार पर एसआईटी द्वारा अनवरत प्रयास कर इस घटना का सफल उद्वेदन कर लिया गया है।
उन्होंने बताया कि घटना का मुख्य कारण वर्ष 2014 से चला आ रहा भूमि विवाद है। वर्ष 2014 में वारसलीगंज थाना क्षेत्र के दौलतपुर ग्राम में के देवेंद्र लाल ने अपनी सात डिसमिल जमीन अपने ही गांव के राजेंद्र सिंह को रजिस्ट्री करने जा रहे थे, इसी क्रम में उनका अपहरण कर लिया गया था, जिसमें इस कांड के वादी राजेश प्रसाद और उनके भाई विवेक सिंह को गिरफ्तार न्यायिक हिरासत सत में भेज दिया गया था।
भूमि संबंधी यह विवाद वहीं समाप्त नहीं हुआ और वर्ष 2017 में उक्त जमीन के क्रेता राजेंद्र सिंह के पुत्र अनिल सिंह पर गांव के ही एक नाबालिग बच्ची से बलात्कार का आरोप लगा, जिसमें उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। भगवान सिंह के पुत्र विवेक सिंह के नेतृत्व में बलात्कार के पीड़ित पक्ष द्वारा अनिल सिंह की पत्नी को डायन घोषित कर सार्वजनिक रूप से गांव में घुमाया गया।
जिस संबंध में वारसलीगंज थाना में कांड दर्ज हुआ था। इस घटना की प्रतिक्रिया में वर्ष 2018 में अनिल सिंह के पुत्र गुड्डू कुमार द्वारा अन्य लोगों के सहयोग से विवेक सिंह की हत्या कर दी गई, जिस मामले में गांव के 11 लोगों को अनुसंधानोंपरांत आरोपित किया गया। इसी क्रम में वर्ष 2023 में रिचार्ज लिपिक उपेंद्र सिंह की हत्या गोली मारकर कर दी गई थी. जिसमें अनिल सिंह के पुत्र सुधांशु उर्फ लाला एवं एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्याय हिरासत में भेजा गया।
सात डिसमिल जमीन पर चल रहे आपसी विवाद को खत्म करने के लिए दोनों पक्षों ने आपस में समझौता कर लिया और 29 जून 2024 को विधवा ममता देवी को जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई यह बात जेठ राजेश प्रसाद को नागवार गुजरी, क्योंकि राजेश चाहता था कि उसकी भाई की हत्या हुई थी तो यह जमीन उसके नाम पर रजिस्ट्री किया जाता। इसी को लेकर ममता देवी की हत्या जेठ राजेश प्रसाद ने अपने दो सहयोगी मनोज सिंह और उसका भांजा रौशन सिंह उर्फ चिरकुट के साथ मिलकर कर दी और घटना को दूसरा रूप दिया गया कि 3 जुलाई को गवाही थी, इसी को लेकर हत्या कर दी गई। अनुसंधान में यह बात गलत पाया गया, क्योंकि जेठ राजेश प्रसाद का बयान शुरू से संदेह के घेरे में था।