इस स्कूल में नहीं चलता सरकार का नियम
शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार और विभाग हर दिन मिशन मोड में नए-नए फरमान जारी कर रहे हैं। औचक निरीक्षण से लेकर अटेंडेंस तक पर सख्ती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन कागजी दावों को मुंह चिढ़ा रही है। ताजा मामला जहानाबाद के सदर प्रखंड का है, जहां एक सरकारी स्कूल में शिक्षकों ने अपनी मर्जी का संविधान लागू कर रखा है।
शिक्षकों के लिए स्कूल आना मूड पर निर्भर
मामला राजकीय प्राथमिक विद्यालय, अंबेडकर नगर मोहल्ले का है। यहां के शिक्षकों के लिए स्कूल आना और जाना बच्चों के भविष्य पर नहीं, बल्कि उनके मूड पर निर्भर करता है। सुबह स्कूल खुला तो सही, लेकिन विद्यालय में तैनात चार शिक्षकों में से केवल एक शिक्षिका ही ड्यूटी पर पहुंचीं। खानापूर्ति के लिए बच्चों को बुलाया गया, मिड-डे मील खिलाया गया और जैसे ही पेट भरा, गुरुजी ने बच्चों की छुट्टी कर दी और खुद स्कूल में ताला जड़कर घर चले गए। स्थानीय अभिभावकों और मासूम बच्चों का दर्द इस व्यवस्था की पोल खोलता है।
बच्चों को खाना खिलाकर वापस भेजा
बच्चों का कहना है कि सुबह वे स्कूल आए थे, लेकिन एक ही मैडम मौजूद थीं। खाना खिलाकर उन्हें यह कहकर घर भेज दिया गया कि उन्हें ट्रेनिंग में जाना है और स्कूल में ताला लगा दिया गया।
सभी शिक्षक अपनी मर्जी के मालिक
अभिभावकों का आरोप है कि यहां तीन महिला और एक पुरुष शिक्षक हैं, लेकिन सभी अपनी मर्जी के मालिक हैं। स्कूल में रहने के दौरान भी ये बच्चों को पढ़ाने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। अगर कोई बच्चा सवाल पूछे या शोर करे, तो कुर्सी पर बैठे-बैठे ही डस्टर फेंककर मारते हैं। यही वजह है कि अब डर के कारण यहां बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है।
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इधर, इस लापरवाही की गूंज जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने सख्त संज्ञान लिया है। डीएम के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी से पूरी रिपोर्ट तलब की गई है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक को शो-कॉज जारी किया गया है। प्रशासन की इस सख्ती से जिले के अन्य लापरवाह शिक्षकों में हड़कंप मच गया है।