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Bihar Board Topper: 'पिता का साया नहीं...मां ने दूध बेचकर पढ़ाया', सलोनी ने मैट्रिक में हासिल की 8वीं रैंक

Sun, 29 Mar 2026 05:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद

सार

औरंगाबाद की सलोनी कुमारी ने 481 अंक व 96.2% के साथ बिहार बोर्ड मैट्रिक 2026 में 8वां स्थान पाया। पिता के निधन के बाद मां ने दूध बेचकर पढ़ाया। अब सलोनी का सपना BDO बनना है।
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औरंगाबाद की सलोनी कुमारी ने 481 अंक व 96.2% के साथ बिहार बोर्ड मैट्रिक 2026 में 8वां स्थान पाया - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बिहार बोर्ड मैट्रिक 2026 का परिणाम आते ही औरंगाबाद जिले के बारूण प्रखंड के अम्बा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। टहल अम्बा के उत्क्रमित एमएस की छात्रा सलोनी कुमारी ने 481 अंक यानी 96.2 प्रतिशत हासिल कर पूरे राज्य में आठवां स्थान प्राप्त किया। यह सफलता इसलिए और भी खास है क्योंकि सलोनी ने बिना किसी कोचिंग क्लास के सिर्फ अपनी मेहनत और लगन के दम पर ये मुकाम हासिल किया।
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बचपन में उठ गया था पिता का साया
सलोनी की जिंदगी की कहानी संघर्ष और हिम्मत की अनोखी मिसाल है। बचपन में ही उनके पिता अरविंद सिंह का निधन हो गया था। घर में कोई भाई नहीं है, सिर्फ दो बहनें हैं। बड़ी बहन सोनम कुमारी अभी बीएससी की पढ़ाई कर रही हैं। पिता के जाने के बाद मां संजू कुंवर ने अकेले दोनों बेटियों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।

दूध बेचकर मां ने पढ़ाया
मां संजू कुंवर ने पुश्तैनी खेती और दो गायों का दूध बेचकर न सिर्फ घर का खर्च चलाया बल्कि दोनों बेटियों को पढ़ाने का सपना भी पूरा किया। जरूरत पड़ने पर रिश्तेदारों ने भी परिवार का हाथ थामा। आज बेटी की इस शानदार कामयाबी पर मां की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। संजू कुंवर कहती हैं कि मेरे लिए मेरी दोनों बेटियां ही बेटा हैं। मैंने उन्हें बेटा मानकर ही सब कुछ किया और आज सलोनी ने गांव में मेरा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
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बिना कोचिंग के हासिल की बड़ी कामयाबी
सलोनी ने बताया कि वह रोजाना छह से सात घंटे मन लगाकर पढ़ाई करती थीं। किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया बस खुद पर भरोसा रखा और लगातार मेहनत करती रहीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय मां, बड़ी बहन और शिक्षकों को दिया। सलोनी का कहना है कि सच्ची मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और आज उनका यही विश्वास सच साबित हुआ।

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BDO बनकर करेंगी समाज सेवा
सलोनी का सपना आगे पढ़कर प्रखंड विकास पदाधिकारी यानी BDO बनना है। वह प्रशासनिक क्षेत्र में जाकर समाज के लिए काम करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह पहले से भी ज्यादा मेहनत करेंगी। सलोनी की यह प्रेरणादायक कहानी हर उस बच्चे के लिए एक मिसाल है, जो मुश्किल हालात में भी बड़े सपने देखने की हिम्मत रखता है।

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