साल 2004 में पेशे से व्यवसायी चंदा बाबू के तीन बेटों गिरीश, सतीश और राजीव का बदमाशों ने अपहरण कर लिया। बदमाशों ने गिरीश और सतीश को तेजाब से नहला कर मार दिया था। जबकि इस मामले में चश्मदीद राजीव किसी तरह बदमाशों की गिरफ्त से अपनी जान बचाकर भाग निकला। बाद में चंदा बाबू ने शहाबुद्दीन के खिलाफ मामला दर्ज कराया। राजीव अपने भाइयों की तेजाब डालकर हुई हत्या के मामले में गवाह बना। लेकिन 2015 में शहर के डीएवी मोड़ पर उसकी भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या के महज 18 दिन पहले ही राजीव की शादी हुई थी। इस घटना के बाद पूरे शहर में हड़कंप मच गया था। राजीव की हत्या के लिए के लिए शहाबुद्दीन और उसके बेटे पर मामला दर्ज कराया गया।
फिर हुई शाहबुद्दीन की गिरफ्तारी
वर्ष 2004 में तेजाब कांड के नाम से मशहूर सनसनीखेज हत्याकांड में शहाबुद्दीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया पर गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन 2005 में जब नीतीश कुमार की सरकार आ गई, तब शहाबुद्दीन पर शिकंजा कसा गया। उसी साल शहाबुद्दीन को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। तभी से शहाबुद्दीन को कड़ी निगरानी के बीच जेल में रखा गया।
शहाबुद्दीन को निचली अदालत ने इस बीच कई मामलों में सजा सुनाई। उनके खिलाफ 39 हत्या और अपहरण के मामले थे। 38 मामलों में शाहबुद्दीन को जमानत मिल चुकी थी। 39वां केस राजीव का था, जो अपने दो सगे भाइयों की हत्या का चश्मद्दीद गवाह था। लेकिन 2014 में उसकी हत्या के साथ ही शहाबुद्दीन की जमानत का रास्ता साफ हो गया था और आखिरकार 11 साल बाद शहाबुद्दीन जमानत पर बाहर आ गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द कर दी थी। तब से वह जेल में था। 16 दिसंबर 2020 को चंदा बाबू की भी मौत हो गई।