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बिहार टॉपर घोटाला: टॉपर बनाने के लिए मिले थे 20-20 लाख रुपये

Thu, 23 Jun 2016 02:57 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिहार बोर्ड के पूर्व चेयरमैन लालकेश्वर सिंह
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बिहार टॉपर घोटाले में एक नया खुलासा हुआ है। बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड (बीएसईबी) के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने यह कबूल किया है कि नकल माफियाओं ने अपात्र छात्रों को टॉप कराने के लिए 20-20 लाख रुपये दिए थे। उन्होंने बुधवार को पुलिस पूछताछ में इस बात का खुलासा किया।
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पुलिस के मुताबिक टॉपर घोटालों के अंजाम देने के अलावा लालकेश्वर सिंह ने यह बात भी कबूल की कि उन्होंनें फर्जी इंटरमीडिएट कॉलेजों को मान्यता देने के लिए 4 लाख रुपये लिए। सिंह और उनकी पूर्व विधायक पत्नी उषा सिन्हा इन दिनों तीन दिन की पुलिस हिरासत में हैं। बिहार टॉपर घोटाले का खुलासा होने के बाद सिंह ने बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और फरार हो गए थे जिन्हें पुलिस ने यूपी के वाराणसी के धर धबोचा था।

इस पूरे कबूलनामे के बारे में पटना के एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान 100 से ज्यादा कॉलेजों को मान्यता दी। इनमें से कई ऐसे कॉलेज भी थे जिनको तय मानक पर खरा नहीं उतरने के बावजूद भी मान्यता दिए गए और इसके लिए मोटी रकम वसूली गई। उन्होंने बताया कि लालकेश्वर सिंह और उनकी पत्नी के अलावा बिसुन राय कॉलेज के प्रमुख बच्चा राय को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इतना ही नहीं पुलिस अपने एफआईआर में बिहार उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष राजीव प्रसाद कुमार रंजन का भी नाम शामिल करेगी। वह कॉलेजों को मान्यता देने वाले बोर्ड के सदस्य थे।
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सौरभ श्रेष्ठ और रूबी राय ने किया था टॉप

bihar board - फोटो : bihar board
उन्होंने बताया कि बिहार के वैशाली जिले में स्थित बिसुन राय कॉलेज के प्रमुख बच्चा राय ने टॉपर छात्रों के परिजनों की तरफ से पैसे दिए और उनके पेपर भी लिखवाए। इस मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब बोर्ड के टॉपर छात्र सौरभ श्रेष्ठ और छात्रा रूबी राय का इंटरव्यू हुआ। इस इंटरव्यू में रूबी राय इंटरमीडिएट में अपने विषयों की जानकारी भी नहीं दे पाई थी और पॉलिटिकल साइंट को 'प्रॉडिकल साइंस' बताया था। 

इस खुलासे के बाद बिहार की शिक्षा व्यवस्था और कॉलेज में हो रही धांधली पर सवाल उठने शुरू हो गए थे जिसके बाद राज्य सरकार ने इस घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन दिया। तब से लेकर अब इस मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। 

पुलिस ने बताया कि इस धांधली के खेल में सिंह ने मगध विश्वविद्याल के वाइस चांसलर के बेटे और अपने दामाद अरुण कुमार के जरिए बीएसईबी के गोपनीय रिजल्ट को छपवाने का काम करते थे। एसएसपी ने बताया कि बुधवार को अरुण कुमार की गिरफ्तारी के उनके घर पर छापा मारा गया था लेकिन वो वहां नहीं मिले। इसके अलावा सिंह की पत्नी उषा सिन्हा से अब तक पूछताछ नहीं की गई है।


Published By: Amit Tiwari
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