नेपाल में लोगों को किसी समय चैन नहीं मिल रहा है। सोमवार की शाम फिर भूकंप ने अगले कई दिनों के लिए उनकी नींद छीन ली है। असर बिहार, उत्तर प्रदेश होकर दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचा। बिहार के नौ जिलों में भूकंप का कंपन महसूस हुआ। मौसम विज्ञान केंद्र पटना के वैज्ञानिक आशीष कुमार ने बताया कि नेपाल के जाजरकोट में भूतल से 10 किलोमीटर नीचे ही भूकंप का केंद्र था, हालांकि तीव्रता पिछले भूकंप के मुकाबले कम होने के कारण बिहार या यूपी में महसूस कम हुआ। बिहार में मुजफ्फरपुर, मधुबनी, गया, पटना, कटिहार, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, पूर्वी और पश्चिम चंपारण सहित अन्य हिस्से में असर रहा है। उत्तराखंड के कुछ हिस्से में भी भूंकप के झटके महसूस किए गए हैं।
पटना में घर में सो रहे थे लोग, अचानक बाहर निकले
बिहार समेत देश में कई राज्यों में तीन अक्टूबर की आधी रात को भूकंप का बड़ा झटका महसूस किया गया। नेपाल में भूकंप का केंद्र था। मौसम विभाग के अनुसार 6.4 तीव्रता का यह भूकंप था, जो शनिवार रात 11 बजकर 32 मिनट पर आया था। भूकंप के झटके बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, दिल्ली समेत कई इलाकों में महसूस किए गए थे। पटना में लोग अपने घरों में सो रहे थे। उन्हें अचानक बाहर निकलना पड़ा।
तीन अक्तूबर को आए भूकंप ने नेपाल में 157 लोगों की जान ली
तीन अक्तूबर को लगभग आधी रात को महसूस किए गए भूकंप के झटकों के बाद नेपाल में 150 से अधिक लोग हताहत हुए थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, तीन अक्तूबर को नेपाल में भूकंप के झटकों से मरने वाले लोगों की संख्या 157 है। नेपाल पुलिस और अन्य आधिकारिक स्रोतों से आई सूचनाओं के अनुसार, नेपाल में दर्जनों लोग घायल भी हुए हैं।
10 हजार से अधिक घर नेपाल में प्रभावित
जानकारी के मुताबिक नेपाल में तीन अक्तूबर को भूकंप के बाद जाजरकोट में 905 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। 2745 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। नेपाल के रुकुम पश्चिम में भूकंप से 2136 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। 2,642 घरों को आंशिक व 4,670 घरों को सामान्य नुकसान पहुंचा है। भूकंप प्रभावित लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने पर मजबूर हैं। रविवार को भी कम तीव्रता वाले भूकंप के झटके (रिक्टर स्केल पर 3.6) महसूस किए गए थे। इसमें जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।